: गठिया रोग से निजात दिलाएंगे ये 10 घरेलू उपाय
Sun, Oct 15, 2023
*गठिया रोग से निजात दिलाएंगे ये 10 घरेलू उपाय*
1. दिन में एक बार सूखे अदरक को पानी में उबालकर उस जल का सेवन करें।
2. रात के समय हल्का भोजन करें और सोने से पहले दूध अवश्य पीएं।
3. रोजाना 10 से 15 मिनट तक सूर्य स्नान करें।
4. स्नान करने से पहले दर्द वाले हिस्से और जोड़ की तेल से मालिश करें।
5. दोपहर का भोजन 12 बजे और रात का भोजन शाम 7 बजे से पहले कर लेना चाहिए।
6. भोजन से पहले टमाटर या सब्जियों का सूप लें।
7. सूप के बाद सलाद खाएं और उसके बाद हरी सब्जी और रोटी लें।
8. भोजन के दौरान पानी नहीं पीएं। मट्ठा या छाछ ले सकते हैं।
9. सुबह उठते ही खाली पेट नींबू मिला गुनगुना जल पीएं।
10. शाम को फलों का रस लें।
: ऋतुओ और स्वास्थ्य का तालमेल...
Sat, Oct 14, 2023
*ऋतुओं और स्वास्थ्य का तालमेल...*
ग्रीष्म ऋतु में दुर्बल हुआ शरीर वर्षा ऋतु में धीरे-धीरे बल प्राप्त करने लगता है।
आद्र वातावरण जठराग्नि को मंद करता है।
वर्षा ऋतु में वात-पित्त जनित व अजिर्रणजन्य रोगों का प्रादुर्भाव होता है।
अत: जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाला वात-पित्तशामक आहार लेना चाहिए।*हितकर आहार :*
इस ऋतु में जठराग्नि प्रदीप्त करनेवाले अदरक, लहसुन, नींबू, पुदीना, हरा धनिया, सोंठ, अजवायन, मेथी, जीरा, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल का प्रयोग करें।
जों, खीरा, लौकी, गिल्की, पेठा, तोरई, आम, जामुन, पपीता, सूरन सेवनीय हैं।
श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ न खायें।
वर्षा ऋतु में दही पूरणत: निषिद्ध है।
ताजी छाछ में काली मिर्च, सेंधा, जीरा, धनिया, पुदीना डालकर ले सकते हैं।
उपवास और लघु भोजन हितकारी है।
रात को देर से भोजन न करे।*अहितकर आहार :*
देर से पचनेवाले, भारी, तले, तीखे पदार्थ न लें।
जलेबी, बिस्कुट, डबलरोटी आदि मैदे की चीजे, बेकरी की चीजे, उड़द, अंकुरित अनाज, ठंडे पेय पदार्थ व आइसक्रीम के सेवन से बचे।
वर्षा ऋतु में दही पूर्णतः निषिध्द हैं।
श्रावण मास में दूध व हरी सब्जियाँ वर्जित हैं।*हितकर विहार :*
आश्रमनिर्मित धूप, हवन से वातावरण को शुद्ध व गों-सेवा फिनायल या गोमूत्र से घर को साफ करें।
तुलसी के पोंधे लगायें।
उबटन से स्नान, तेल की मालिश, हलका व्यायाम, स्वच्छ व हलके वस्त्र पहनना हितकारी हैं।
वातावरण में नमी और आर्द्रता के कारण उत्पन्न कीटाणुओं से सुरक्षा हेतु अश्रामनिर्मित धूप व हवन से वातावरण को शुद्ध तथा गौसेवा फिनायल या गोमुत्र से घर को स्वच्छ रखे।
घर के आसपास पानी इकठ्ठा न होने दे।
मच्छरों से सुरक्षा के लिए घर में गेंदे के पौधों के गमले अथवा गेंदे के फुल रखे और नीम के पत्ते, गोबर के कंड़े व गूगल आदि का धुआँ करे।*अपथ्य विहार :*
बारिश में न भींगे।
भीगे कपड़े पहनकर न रखें।
रात्रि-जागरण, दिन में शयन, खुले में शयन, अति परिश्रम एवं अति व्यायाम वर्जित है।
: क्यों बंदर बीमार नहीं होता
Thu, Oct 12, 2023
इस बारे में सोचना जरूर बन्दर कभी बीमार नहीं होता।◆ किसी भी चिड़िया को डायबिटीज नहीं होती।◆ किसी भी बन्दर को हार्ट अटैक नहीं आता ।◆ कोई भी जानवर न तो आयोडीन नमक खाता है और न ब्रश करता है, फिर भी किसी को थायराइड नहीं होता और न दांत खराब होता है ।बन्दर शरीर संरचना में मनुष्य के सबसे नजदीक है, बस बंदर और आप में यही फर्क है कि बंदर के पूँछ है आपके नहीं है, बाकी सब कुछ समान है।तो फिर बंदर को कभी भी हार्ट अटैक, डायबिटीज , High BP , क्यों नहीं होता है ?एक पुरानी कहावत है बंदर कभी बीमार नहीं होता और यदि बीमार होगा तो जिंदा नहीं बचेगा मर जाएगा!बंदर बीमार क्यों नहीं होता ?एक प्रोफेसर साहब मेडिकल कॉलेज में काम करते हैं । उन्होंने एक बड़ा गहरा रिसर्च किया कि बंदर को बीमार बनाओ। तो उन्होने तरह - तरह के virus और वैक्टीरिया बंदर के शरीर में डालना शुरू किया, कभी इंजेक्शन के माध्यम से कभी किसी और माध्यम से । वो कहते है, मैं 15 साल असफल रहा , लेकिन बंदर को कुछ नहीं हुआ।उनसे पूछा गया कि बन्दर को क्यों कुछ नही हुआ? तब उन्होंने एक दिन यह रहस्य की बात बताई, कि बंदर का जो RH factor है वह सबसे आदर्श है । कोई डॉक्टर जब आपका RH factor नापता है, तो वह बंदर के ही RH Factor से तुलना करता है , वह डॉक्टर आपको बताता नहीं यह अलग बात है।उसका कारण यह है कि, उसे कोई बीमारी आ ही नहीं सकती । उसके ब्लड में कभी कॉलेस्टेरॉल नहीं बढ़ता , कभी ट्रायग्लेसराइड नहीं बढ़ती , न ही उसे कभी डायबिटीज होती है। शुगर को कितनी भी बाहर से उसके शरीर में इंट्रोडयूस करो, वो टिकती नहीं । तो प्रोफेसर साहब कहते हैं कि यही चक्कर है , कि बंदर सबेरे-सबेरे ही भरपेट खाता है। जो आदमी नहीं खा पाता है , इसीलिए उसको सारी बीमारियां होती हैं।सूर्य निकलते ही सारी चिड़िया , सारे जानवर खाना खाते हैं ।
जब से मनुष्य इस ब्रेकफास्ट , लंच , डिनर के चक्कर में फंसा तब से मनुष्य ज्यादा बीमार रहने लगा है ।प्रोफेसर रवींद्रनाथ शानवाग ने अपने सभी मरींजों से कहा कि सुबह-सुबह भरपेट खाओ। उनके मरीज बताते है कि, जब से उन्हांने सुबह भरपेट खाना शुरू किया तब से उन्हें डायबिटीज यानि शुगर कम हो गयी, किसी का कॉलेस्टेरॉल कम हो गया, किसी के घुटनों का दर्द कम हो गया , किसी का कमर का दर्द कम हो गया गैस बनाना बंद हो गई, पेट मे जलन होना बंद हो गया ,नींद अच्छी आने लगी.. वगैरह ..वगैरह।और यह बात "बागभट्ट जी" ने 3500 साल पहले कहा, कि सुबह का किया हुआ भोजन सबसे अच्छा है ।सुबह सूरज निकलने से ढाई घंटे तक यानि 9.30 बजे तक, ज्यादा से ज्यादा 10 बजे तक आपका भरपेट भोजन हो जाना चाहिए। और ये भोजन तभी होगा जब आप नाश्ता बंद करेंगे । यह नाश्ता का प्रचलन हिंदुस्तानी नहीं है , यह अंग्रेजो की देन है , और रात्रि का भोजन सूर्य अस्त होने से पहले आधा पेट कर लें । तभी बीमारियों से बचेंगे । सुबह सूर्य निकलने से ढाई घंटे तक हमारी जठराग्नि बहुत तीव्र होती है । हमारी जठराग्नि का सम्बन्ध सूर्य से है। हमारी जठराग्नि सबसे अधिक तीव्र स्नान के बाद होती है। स्नान के बाद पित्त बढ़ता है , इसलिए सुबह स्नान करके भोजन कर लें । तथा एक भोजन से दूसरे भोजन के बीच ४ से ८ घंटे का अंतराल रखें बीच में कुछ न खाएं, और दिन डूबने के बाद बिल्कुल न खायें।।
चूंकि यह पक्षियों और जंगली जानवरों की दिनचर्या में सम्मिलित है, अत: वे कभी भी जल्दी बीमार नहीं होते।स्वस्थ रहे, स्वस्थ रखें
आयुर्वेद अपनाए निरोग जीवन जिए।
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