खाद्य व्यवसाय में जवाबदेही बढ़ाने और उपभोक्ता हितों की रक्षा करने में : जियो टैगिंग के बाद ही मिलेगा फूड लाइसेंस, बिना लाइसेंस संचालित दुकानों पर होगी सख्ती
Mon, Jun 22, 2026
जियो टैगिंग के बाद ही मिलेगा फूड लाइसेंस, बिना लाइसेंस संचालित दुकानों पर होगी सख्ती
भोपाल। मध्य प्रदेश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने लाइसेंसिंग व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी नए खाद्य प्रतिष्ठान, होटल, रेस्टोरेंट, मिठाई दुकान, किराना, डेयरी या अन्य खाद्य व्यवसाय को फूड सेफ्टी लाइसेंस तभी जारी किया जाएगा, जब उसकी जियो टैगिंग और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त कार्यालय, भोपाल द्वारा प्रारंभ की जा रही इस व्यवस्था की शुरुआत राजधानी भोपाल से होगी, जिसे बाद में पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इसके तहत खाद्य सुरक्षा अधिकारी संबंधित प्रतिष्ठान पर पहुंचकर मोबाइल एप के माध्यम से दुकान की फोटो, जीपीएस लोकेशन और अन्य आवश्यक जानकारी ऑनलाइन दर्ज करेंगे। जियो टैगिंग पूर्ण होने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में संचालित सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की सटीक संख्या और उनका अद्यतन डाटा उपलब्ध नहीं है। कई प्रतिष्ठान बिना लाइसेंस अथवा पंजीयन के संचालित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश के सभी खाद्य व्यवसायों का डिजिटल डाटाबेस तैयार करना तथा प्रत्येक प्रतिष्ठान की वास्तविक स्थिति और लोकेशन का रिकॉर्ड शासन के पास उपलब्ध कराना है।
नई व्यवस्था के तहत पहले से संचालित दुकानों, रेस्टोरेंट्स और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का भी चरणबद्ध तरीके से भौतिक सत्यापन एवं जियो टैगिंग की जाएगी। जिन प्रतिष्ठानों के पास वैध फूड लाइसेंस या पंजीयन नहीं होगा, उन्हें नियमों के अनुरूप पंजीयन कराना होगा। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए उनका संचालन बंद भी कराया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जियो टैगिंग व्यवस्था लागू होने से बिना अनुमति संचालित खाद्य प्रतिष्ठानों की पहचान आसान होगी, निरीक्षण प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी तथा मिलावट, अस्वच्छ खाद्य पदार्थों और नियमों के उल्लंघन पर त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित यह पहल न केवल लाइसेंसिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि खाद्य व्यवसाय में जवाबदेही बढ़ाने और उपभोक्ता हितों की रक्षा करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। भोपाल से शुरू होने वाली यह व्यवस्था भविष्य में पूरे मध्य प्रदेश के खाद्य सुरक्षा तंत्र को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
पेड़ लगाना जितना आवश्यक है उससे कहीं अधिक जरूरी मौजूदा जंगलों को बचाना : जंगलों की कटाई रोकने की मांग, मानसून से पहले पर्यावरण संरक्षण पर जोर
Fri, Jun 19, 2026
जंगलों की कटाई रोकने की मांग, मानसून से पहले पर्यावरण संरक्षण पर जोर
भोपाल। मानसून के आगमन से पहले पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन को लेकर विभिन्न सामाजिक एवं पर्यावरण संगठनों ने जंगलों की अंधाधुंध कटाई पर रोक लगाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि वन क्षेत्र वर्षा चक्र को संतुलित रखने, भूजल स्तर बढ़ाने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान वृक्षारोपण अभियान तो चलाए जाते हैं, लेकिन यदि मौजूदा जंगलों की कटाई जारी रही तो नए पौधों के रोपण का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाएगा। उनका मानना है कि पुराने और घने जंगल प्राकृतिक जल संरक्षण के सबसे प्रभावी साधन हैं।
संगठनों ने सरकार से मांग की है कि मानसून से पहले वन क्षेत्रों में होने वाली अवैध कटाई पर सख्ती से रोक लगाई जाए, वन संरक्षण कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी से जंगलों की सुरक्षा को मजबूत बनाया जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि "पेड़ लगाना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक जरूरी मौजूदा जंगलों को बचाना है।" उनका मानना है कि स्वस्थ वन क्षेत्र न केवल बेहतर वर्षा में सहायक होते हैं, बल्कि बढ़ते तापमान और जल संकट जैसी चुनौतियों से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मानसून की दस्तक से पहले जंगलों के संरक्षण को लेकर उठ रही यह मांग पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।