सांसदों ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि: MRP तय करने की प्रक्रिया : सरकार क्या नहीं करती: सामान्य वस्तुओं की MRP तय नहीं करती
Ashwani Kumar Sinha
Sat, May 2, 2026
“MRP व्यवस्था पर सवाल: क्या उपभोक्ता के साथ हो रहा है भ्रम?”
नई दिल्ली। देश में वस्तुओं पर अंकित ‘अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP)’ को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। उपभोक्ता संगठनों और कई जनप्रतिनिधियों ने संसद में भी इस प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्न उठाए हैं।
संसद में उठे सवाल
लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न अवसरों पर सांसदों ने सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि:
MRP तय करने की प्रक्रिया क्या है?
क्या सरकार इसकी कोई सीमा तय करती है?
क्या मनमानी रोकने के लिए कोई तंत्र है?
सरकार ने अपने जवाब में स्पष्ट किया कि:
MRP का निर्धारण निर्माता/पैकर/आयातक करता है
सरकार केवल यह सुनिश्चित करती है कि MRP से अधिक वसूली न हो
सामान्य वस्तुओं के लिए कोई पूर्व सरकारी अनुमति आवश्यक नहीं है
यह जवाब Legal Metrology Act, 2009 के तहत लागू नियमों के अनुरूप है।
सरकार की वास्तविक भूमिका क्या है?
सरकार का काम:
MRP छापना अनिवार्य करना
MRP से अधिक वसूली पर कार्रवाई करना
भ्रामक जानकारी रोकना
सरकार क्या नहीं करती:
सामान्य वस्तुओं की MRP तय नहीं करती
हर उत्पाद के मूल्य की पूर्व मंजूरी नहीं देती
जहाँ सरकार सीधे हस्तक्षेप करती है
कुछ क्षेत्रों में सरकार कीमत नियंत्रित करती है:
दवाइयाँ: National Pharmaceutical Pricing Authority
आवश्यक वस्तुएँ: Essential Commodities Act, 1955
उपभोक्ता संगठनों की आपत्ति
Akhil Bharatiya Grahak Panchayat सहित कई संगठनों का कहना है:
कंपनियाँ ऊँची MRP छापकर भारी छूट दिखाती हैं
वास्तविक लागत और MRP में भारी अंतर होता है
उपभोक्ता “छूट” के भ्रम में खरीदता है
मांग:
उत्पादन लागत भी छापी जाए
MRP निर्धारण के लिए मानक बने
एक नियामक प्राधिकरण बने
उपभोक्ता अधिकार कानून क्या कहता है?
Consumer Protection Act, 2019
यह कानून उपभोक्ताओं को देता है:
भ्रामक विज्ञापन के खिलाफ शिकायत का अधिकार
गलत मूल्य वसूली पर कार्रवाई
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में सुरक्षा
वास्तविक समस्या क्या है?
MRP की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं
कंपनियों को मूल्य तय करने की स्वतंत्रता
“Discount culture” से भ्रम
उपभोक्ता को “उचित कीमत” का अंदाजा नहीं
निष्कर्ष (संतुलित सच्चाई)
MRP प्रणाली पूरी तरह बेकार या धोखा नहीं है, लेकिन:
यह आधा नियंत्रित और आधा स्वतंत्र मॉडल है
सरकार केवल निगरानी करती है, कीमत तय नहीं
इसी कारण बाजार में मनमानी और भ्रम की स्थिति बनती है
जब तक: मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता , लागत आधारित जानकारी , और सख्त नियमन नहीं होगा
तब तक MRP उपभोक्ता के लिए सुरक्षा के साथ-साथ भ्रम का कारण भी बनी रहेगी।
विज्ञापन