देश भर से शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने : शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय भोपाल में “विकसित भारत 2047” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Feb 7, 2026
शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय भोपाल में “विकसित भारत 2047” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न।
शासकीय कला एवं वाणिज्य (नवीन) महाविद्यालय, भोपाल द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल के सहयोग से “विकसित भारत 2047 : उच्च शिक्षा परिवर्तन की आधारशिला (सपनों से संकल्प तक)” विषय पर 06 एवं 07 फरवरी 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य उच्च शिक्षा में आवश्यक परिवर्तन, उसके आधार स्तंभों तथा भावी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श करना रहा।
संगोष्ठी के प्रथम दिवस का शुभारंभ माँ सरस्वती की प्रतिमा पर प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा, संगोष्ठी संयोजक डॉ. कलावती कोरी, विशिष्ट अतिथि अतिरिक्त संचालक डॉ. मथुरा प्रसाद एवं मुख्य अतिथि डॉ. अल्पना त्रिवेदी द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
प्राचार्य डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन में महाविद्यालय का परिचय देते हुए संगोष्ठी के विषय की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संगोष्ठी संयोजक डॉ. कलावती कोरी ने दो दिवसीय संगोष्ठी की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए अनुसंधान एवं नवाचार को उच्च शिक्षा परिवर्तन की आधारशिला बताया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. मथुरा प्रसाद ने भारतीय सनातन परम्पराओं के पुनर्मूल्यांकन एवं संरक्षण पर बल दिया, जबकि मुख्य वक्ता डॉ. अल्पना त्रिवेदी ने भारतीय ज्ञान परम्परा, साहित्य तथा ज्ञान-विज्ञान की भूमिका को रेखांकित किया।
प्रथम सत्र में प्रमुख वक्ता डॉ. शीलचंद्र गुप्ता एवं डॉ. मदन धनौरा ने विकसित भारत के लक्ष्य पर अपने विचार रखे। सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. आलोक वर्मा ने विकसित भारत 2047 के लिए विद्यार्थी एवं शिक्षक के समन्वय को आवश्यक बताया। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. आर. के. विजयवर्गीय ने की, जिसमें डॉ. माया काकोरिया, रश्मि श्रीवास्तव, ममता कुशगोतिया, माधवी अभिचंदानी एवं साधना यदुवंशी द्वारा शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
द्वितीय दिवस में प्रमुख वक्ता डॉ. अमरनाथ शर्मा, प्रो. सुचित्रा शर्मा एवं प्रथम सत्र के अध्यक्ष डॉ. अजय अग्रवाल रहे। वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, भारतीय ज्ञान परम्परा, सतत विकास लक्ष्य, अमृतकाल की संकल्पना तथा उच्च शिक्षा की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। द्वितीय सत्र की अध्यक्षता डॉ. शोभना जैन ने की, जिसमें अर्चना उइके अस्थाना, मनीष दुबे, डॉ. सारिका मिश्रा, डॉ. मुक्तेश तिवारी, सीमा कीर एवं ज्योति मिश्रा ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
संगोष्ठी में उच्च शिक्षा में परिवर्तन की आवश्यकता, आवश्यक कदम, संभावित परिणामों के साथ-साथ राष्ट्रीय शिक्षा नीति, युवा, रोजगार, सामाजिक एवं महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सशक्तिकरण, ई-गवर्नेंस, सुशासन एवं व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर शोध पत्रों के माध्यम से गहन चर्चा की गई। देशभर से शिक्षाविदों, विषय विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों ने संगोष्ठी में सहभागिता की।
समापन सत्र में संगोष्ठी संयोजक डॉ. कलावती कोरी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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