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: किशोर न्याय बोर्ड और न्याय में इतना विरोधाभाषी ?

Admin

Thu, May 23, 2024

किशोर न्याय बोर्ड राज्य के हरेक जिले में होता हैं , तीन सदस्यों से मिल कर बोर्ड बनता है,  इस बोर्ड के समक्ष विधि के उल्लंघन करने वाले बालकों का प्रकरण लाया जाता हैं। बोर्ड के अध्यक्ष प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट होते हैं एवम् दो अशासकीय सदस्य होते हैं। यह बोर्ड एक न्यायपीठ का रूप लेगी। बोर्ड के समक्ष प्रकरण पुलिस द्वारा लाया जाता हैं बोर्ड के यह दो सदस्य के आवदेन पत्रों की छाया प्रति , किसी अन्य को आर.टी.आई. से मांगने पर देना है की नही, यह सहमति नियुक्त आवेदक को आवदेन पत्र में पहले से मांग लिया गया है ? मध्य प्रदेश शासन ने ऐसा किया हैं । (पारदर्शिता खत्म) यह दो सदस्य चयनित होने पर अपने कार्यकाल के दौरान किसी भी राजनैतिक दल का पदाधिकारी नहीं होना चाहिए।

दो न्याय (पहला) पुणे के एक रईसजादे किशोर (17) ने दोस्तों के साथ शराब पी, 48 हजार रु के बिल का भुगतान किया और फिर ढाई करोड़ रुपए की पोर्श कार को 160 की स्पीड से चला कर दो युवा इंजीनियर्स को मार डाला। किशोर न्यायालय ने उसे दुर्घटना पर निबंध लिखने और आरटीओ ऑफिस में जा कर ट्रैफिक नियम समझने की शर्त लगा कर छोड़ दिया । दुसरा  दूसरी घटना उत्तराखंड की है, जहां एक 14 वर्षीय किशोर ने साथ पढ़ने वाली लड़की का नग्न वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर डाला, जिससे छूब्ध लड़की ने आत्महत्या कर ली। 5 माह से बाल संरक्षण गृह में बंद इस किशोर को किशोर न्यायालय ने जमानत नहीं दी, हाई कोर्ट ने यह कह कर निचली कोर्ट का आदेश बहाल रखा की (अपराध को देखते हुए जमानत देने से गलत संदेश जाएगा) ।  हाई कोर्ट ने कहा कि यह किशोर अनडिसिप्लिंड हैं। और इसे छोड़ना खतरनाक हो सकता है। लड़के की मां ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन कोर्ट ने भी जमानत से इनकार करते हुए हाई कोर्ट का आदेश सही माना । आखिर क्या वजह है जिस बात को तीन स्तर की कोर्ट्स खतरे के रूप में देख रही हैं, उसे पुणे के मामले में किशोर न्यायालय नहीं देख सका और एक ऐसी शर्त रखी, जो पीड़ित परिवार के साथ भद्दा मजाक हैं। यह फैसला कई सवाल खड़े करता हैं । नोट, कई किशोर न्यायालय में एक ही बालक एक साल में 4 से 5 बार आ रहे हैं केस में , किशोर न्यायालय 100/200 रूपए फाईन लगा कर छोड़ रही है , इससे बालकों का हौसला और भी बुलंद हो रहा है और वे बड़े क्राईम की ओर जा सकते है ।     

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