यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को : इंडिया से भारत” की यात्रा साकार होती दिख रही है : डॉ. मोहन यादव
Ashwani Kumar Sinha
Tue, May 5, 2026
“इंडिया से भारत” की यात्रा साकार होती दिख रही है : डॉ. मोहन यादव
भोपाल, 5 मई। प्रज्ञा प्रवाह मध्यभारत प्रांत द्वारा आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में लेखक प्रशांत पोल की पुस्तक “इंडिया से भारत - एक प्रवास” का विमोचन मंगलवार सायं कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक केवल साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि भारत के वैचारिक, सांस्कृतिक और आत्मगौरवपूर्ण पुनर्जागरण की सजीव अभिव्यक्ति है। उन्होंने वर्ष 2014 से 2026 तक के कालखंड को भारत के लिए “स्वर्णिम दौर” बताते हुए कहा कि देश आज आत्मविश्वास, सांस्कृतिक चेतना और निर्णायक नेतृत्व के नए युग में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने कहा कि लेखक प्रशांत पोल ने पुस्तक में औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होकर भारत के आत्मसम्मान की पुनर्स्थापना की यात्रा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। इस परिवर्तन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और प्रज्ञा प्रवाह की भूमिका को उन्होंने महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हेमंत शर्मा (निदेशक, टीवी9 भारतवर्ष) ने की। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और राष्ट्रीय पहचान को समझने के लिए प्रेरित करती है। साथ ही उन्होंने पुस्तकों के घटते पठन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य समाज में बौद्धिक जागरण का प्रमुख माध्यम है।
इस अवसर पर राकेश सिंह (मंत्री, लोक निर्माण विभाग), डॉ. रविंद्र कान्हेरे (अखिल भारतीय अध्यक्ष, विद्या भारती), दीपक शर्मा (सह-संयोजक, प्रज्ञा प्रवाह) सहित अनेक गणमान्य अतिथि, प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
पुस्तक का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
लेखक प्रशांत पोल ने बताया कि पुस्तक 1965 से 2014 तक भारत की यात्रा को रेखांकित करती है। उन्होंने 1965 भारत-पाक युद्ध के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री बलवंत राय मेहता की पाकिस्तान वायुसेना द्वारा हत्या की घटना का उल्लेख करते हुए इसे उस समय के “कमजोर भारत” का प्रतीक बताया।
उन्होंने 1969 में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक में भारत के अपमानजनक अनुभव का भी जिक्र किया और कहा कि उस दौर में भारत की अंतरराष्ट्रीय स्थिति कमजोर थी।
लेखक के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद भारत में नेतृत्व, आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता में बड़ा बदलाव आया। कोविड काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने स्वदेशी वैक्सीन विकसित कर वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्रज्ञा प्रवाह की भूमिका
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रज्ञा प्रवाह की स्थापना 1987 में भारतीय बौद्धिक पुनर्जागरण के उद्देश्य से हुई थी। यह संगठन शिक्षा, नीति और सामाजिक विमर्श के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना की और शिक्षण संस्थानों में अध्ययन समूह सक्रिय करने की आवश्यकता पर बल दिया।
शोध प्रस्तुतियाँ भी हुईं
कार्यक्रम में सूचना का अधिकार और युवा विमर्श से संबंधित शोध रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। मुख्यमंत्री ने इन अध्ययनों को शासन स्तर पर उपयोगी बताते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को अध्ययन हेतु सौंपने की बात कही।
कार्यक्रम का संचालन अभिषेक शर्मा ने किया, जबकि आभार धीरेंद्र चतुर्वेदी ने व्यक्त किया।
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