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कोर्ट ने जताई चिंता : सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "नई पीढ़ी कोर्ट क्राफ्ट सीखने को तैयार नहीं"

Ashwani Kumar Sinha

Thu, Jun 12, 2025

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "नई पीढ़ी कोर्ट क्राफ्ट सीखने को तैयार नहीं"

नई दिल्ली, 12 जून 2025
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक अहम टिप्पणी में चिंता जताई कि आज की युवा पीढ़ी वकालत के पेशे में जरूरी अनुशासन और पेशेवर परिपक्वता को अपनाने से कतराती है। यह टिप्पणी उस वक्त सामने आई जब एक युवा वकील, आदेश लिखवाए जाने के दौरान कैजुअली अदालत से बाहर जाने लगी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस.वी. भट्टी और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ कर रही थी। जैसे ही सुनवाई के दौरान बेंच ने आदेश लिखवाना शुरू किया, महिला वकील बिना अनुमति के कोर्ट से बाहर जाने लगी। यह देखकर पीठ ने नाराज़गी जताई और तल्ख टिप्पणी की—
"नई पीढ़ी कोर्ट क्राफ्ट नहीं सीखना चाहती।"

क्या है 'कोर्ट क्राफ्ट'?
न्यायालय में पेश होने की कला यानी कोर्ट क्राफ्ट का अर्थ केवल कानून की किताबें पढ़ लेना नहीं होता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले को पढ़ना केवल 30% हिस्सा है, जबकि शेष 70% भाग अदालत की कार्यवाही, प्रस्तुतीकरण, जज की बातों को समझना, आदेश को ध्यानपूर्वक सुनना और कोर्ट की गरिमा का सम्मान करना है।

कोर्ट ने जताई चिंता
जजों ने कहा कि यह प्रवृत्ति खतरनाक है, क्योंकि वकील का पेशा केवल दलील देना भर नहीं, बल्कि न्याय की प्रक्रिया का एक जीवंत हिस्सा बनकर काम करना होता है।
उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को यह समझना चाहिए कि कोर्ट में मौजूद रहकर, आदेशों को सुनकर और प्रक्रिया के हर चरण में शामिल रहकर ही वे अनुभव प्राप्त कर सकते हैं।

क्या कहता है यह संदेश?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी न केवल युवा वकीलों के लिए चेतावनी है, बल्कि पूरे विधि शिक्षा तंत्र को एक बार फिर सोचने पर विवश करती है कि क्या हम अपने भावी अधिवक्ताओं को केवल परीक्षा पास कराने पर केंद्रित हैं या उन्हें न्याय व्यवस्था की आत्मा से भी जोड़ पा रहे हैं।

निष्कर्ष:
सुप्रीम कोर्ट की यह बात एक गहरा संदेश देती है कि वकालत केवल एक पेशा नहीं, बल्कि न्याय की सेवा का माध्यम है। नई पीढ़ी को केवल कानूनी ज्ञान नहीं, बल्कि नैतिक अनुशासन, पेशेवर गरिमा और कोर्ट के तौर-तरीकों की गहराई से समझ भी विकसित
करनी होगी।


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