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अदालतें न्याय देने के लिए हैं, न कि निजी लेन-देन की वसूली करने के लिए : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अदालतें रिकवरी एजेंट नहीं बन सकतीं

Ashwani Kumar Sinha

Wed, Sep 24, 2025

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अदालतें रिकवरी एजेंट नहीं बन सकतीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि अदालतों का काम न्याय देना है, न कि पैसों की वसूली करना। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि किसी भी व्यक्ति से बकाया रकम की वसूली के लिए गिरफ्तारी की धमकी देना या अदालतों का इस्तेमाल करना कानून के खिलाफ है।

अदालत ने कहा कि हाल के दिनों में यह गलत प्रवृत्ति बढ़ रही है कि लोग पैसे की वसूली के लिए आपराधिक (क्रिमिनल) मामले दर्ज करा देते हैं, जबकि असल में यह विवाद सिविल (निजी लेन-देन से जुड़े) मामलों का होता है। सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अदालतों को "रिकवरी एजेंट" की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

इस फैसले का असर आम लोगों पर

  • अगर किसी से आपका पैसा लेना है तो उसके लिए सिविल प्रक्रिया (दीवानी मुकदमा) अपनाना होगा।

  • केवल पैसे की वसूली के लिए किसी को डराना, धमकाना या क्रिमिनल केस दर्ज कराना उचित नहीं है।

  • अदालतें न्याय देने के लिए हैं, न कि निजी लेन-देन की वसूली करने के लिए।

यह फैसला आम आदमी को राहत देता है, क्योंकि अब उन्हें झूठे आपराधिक मामलों में फंसाकर पैसे वसूलने की कोशिश पर अंकुश लगेगा।

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