: छोटे संगठित अपराध* है जिसका विवरण:- छोटे संगठित अपराध या सामान्य रूप से संगठित
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Sat, Aug 10, 2024
*BNS 111(1) | Organised crime definition*
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(1) के अनुसार, अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरन वसूली, भूमि पर कब्जा, अनुबंध हत्या, आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, व्यक्तियों की तस्करी, ड्रग्स, हथियारों, अवैध माल या सेवाओं का दुर्व्यापार, वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए मानव दुर्व्यापार किसी संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य द्वारा या ऐसे सिंडिकेट का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह द्वारा कोई सतत् विधिविरुद्ध कार्य भौतिक लाभ या वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए हिंसा, हिंसा की धमकी, दवाब, उत्पीड़न या अन्य विधिविरुद्ध साधनों द्वारा किया गया हो, तो ऐसे कार्य संगठित अपराध कहलाएंगे।
स्पष्टीकरण: उपरोक्त धारा से सम्बंधित कुछ कठिन शब्दों की परिभाषाएं नीचे दी गयी हैं:
संगठित अपराध सिंडिकेट- दो या दो से अधिक व्यक्तियों का समूह जो एक टोली के रूप में या तो अकेले या सामूहिक रूप से किसी सतत् विधि विरुद्ध कार्य में लिप्त हो।
सतत् विधिविरुद्ध कार्य- ऐसे अवैध कार्य जो संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हों, और जिनमें 3 वर्ष या उससे अधिक अवधि के कारावास का प्रावधान हो, यदि किसी पर 10 वर्षों की अवधि के भीतर एक न्यायालय के समक्ष ऐसे एक से अधिक आरोप पत्र दाखिल किया जा चुके हो, और उस न्यायालय ने ऐसे अपराध का मुकदमा ग्रहण कर लिया हो और इसमें आर्थिक अपराध भी शामिल हों, तो ऐसे कार्य को सतत् विधिविरुद्ध कार्य कहेंगे।
संज्ञेय अपराध- संज्ञेय अपराध को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 2(g) में परिभाषित किया गया है। संज्ञेय अपराध का अर्थ है- एक ऐसा अपराध जिसमें कोई पुलिस अधिकारी पहली अनुसूची के अनुसार या उस वक्त लागू किसी अन्य कानून के तहत बिना वारंट के किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है। जैसे: हत्या, बलात्कार, अपहरण, डकैती आदि।
आर्थिक अपराध- आर्थिक अपराध में आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी मुद्रा नोटों, बैंक नोटों और सरकारी टिकटों की जलसाजी, हवाला लेनदेन, बड़े पैमाने पर मार्केटिंग धोखाधड़ी या कई व्यक्तियों को धोखा देने के लिए कोई योजना चलाना या किसी दूसरे तरीके से कोई कार्य करना शामिल है। इसके अलावा किसी भी रूप में मौद्रिक लाभ प्राप्त करने के लिए किसी बैंक या वित्तीय संस्था या किसी अन्य संस्था या संगठन को धोखा देने के उद्देश्य से किया गया कार्य भी आर्थिक अपराध कहलाएगा।
BNS 111(2)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(2) के अनुसार, जो कोई संगठित अपराध कारित करेगा-
(a) यदि ऐसे अपराध के परिणामस्वरुप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो अपराधी को मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹10 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा की लालू से दुश्मनी थी, भूरा ने एक हत्यारे गैंग से संपर्क किया जिसमें तीन सदस्य थे, भूरा ने लालू की हत्या करने के लिए उन्हें ₹50000 दिए, उस हत्यारे गैंग के तीन सदस्यों ने मिलकर लालू की हत्या कर दी, इस मामले में भूरा और उस हत्यारे गैंग के तीन सदस्यों को उपरोक्त उपधारा के अनुसार मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा, और वे सभी जुर्माने के लिए भी दायी होंगे, जो ₹10 लाख से कम नहीं होगा।
(b) किसी अन्य मामले में अपराधी को 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा, लालू और कालू ने मिलकर लालसिंह के घर पर डकैती डाली, पकड़े जाने पर भूरा, लालू और कालू को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
BNS 111(3)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(3) के अनुसार, जो कोई संगठित अपराध का दुष्प्रेरण, प्रयत्न, षड्यंत्र करता है या जानबूझकर संगठित अपराध को अंजाम देने में मदद करता है या किसी संगठित अपराध की तैयारी में शामिल होता है, तो उसे 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा, लालू और कालू तीनों मिलकर लालसिंह की भूमि पर अवैध कब्जा करना चाहते थे, इसमें लालसिंह के पड़ोसी भानू ने दुश्मनी के चलते भूरा, लालू और कालू की उस भूमि पर अवैध कब्जा प्राप्त करने में मदद की, लालसिंह के द्वारा न्यायालय में उसका भूमि पर वैध कब्जा साबित किए जाने के बाद भूरा, लालू, कालू और भानू को उपरोक्त उपाधारा के अनुसार 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
BNS 111(4)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(4) के अनुसार, जो कोई संगठित अपराध सिंडिकेट का सदस्य है, उसे 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा एक ऐसे गैंग का सदस्य है, जो अवैध रूप से जबरन वसूली किया करते हैं, ऐसा साबित होने के बाद भूरा को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 5 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
BNS 111(5)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(5) के अनुसार, जो कोई किसी व्यक्ति को जिसने संगठित अपराध कार्य किया है, उसे जानबूझकर शरण देगा या छिपाएगा, तो उसे 3 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: लालू एक हत्यारे गैंग का सदस्य है, जिस पर हत्या का मुकदमा भी चल रहा है, वह किसी की हत्या करके कालू के घर पर शरण लेता है, जिसकी जानकारी कालू को पहले से थी, ऐसे मामले में कालू को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 3 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹5 लाख से कम नहीं होगा।
नोट: परंतु यह उपाधारा उस दशा में लागू नहीं होगी, जिसमें शरण देना या छिपाना अपराधी के पति-पत्नी द्वारा किया जाता है।
BNS 111(6)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(6) के अनुसार, जो कोई, किसी संगठित अपराध के किए जाने से प्राप्त या संगठित अपराध की आय से प्राप्त या संगठित अपराध के माध्यम से अर्जित किसी संपत्ति पर कब्जा रखता है, तो उसे 3 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹2 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा, लालू और कालू तीनों ने मिलकर एक कार चुराई, और उसे लालसिंह के फार्म पर छिपा दिया, लालसिंह को इसकी पूर्ण जानकारी होने के बावजूद भी उसने कार को अपने फार्म पर छिपाने की अनुमति दी, ऐसे मामले में लालसिंह को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 3 वर्ष से आजीवन कारावास तक दंडित किया जा सकेगा, और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹2 लाख से कम नहीं होगा।
BNS 111(7)
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111(7) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास संगठित अपराध सिंडिकेट के सदस्य की ओर से चल या अचल संपत्ति है या कभी भी रही है, जिसका वह सही-सही हिसाब नहीं दे सकता है, उसे 3 वर्ष से 10 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकेगा और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹1 लाख से कम नहीं होगा।
उदाहरण: भूरा के ऊपर लालू ने मुकदमा लगाया कि लालू के मकान को एक अपराधी गिरोह ने भूरा को सस्ते में बेच दिया, जब भूरा से न्यायालय में मकान के कागजात मांगे गए तो उसने फर्जी कागजात दिखाए, इस मामले में भूरा को उपरोक्त उपधारा के अनुसार 10 वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जा सकेगा और वह जुर्माने के लिए भी दायी होगा, जो ₹1 लाख से कम नहीं होगा।
Sec 112 BNS
*छोटे संगठित अपराध* है जिसका विवरण:-
छोटे संगठित अपराध या सामान्य रूप से संगठित
(1) कोई भी अपराध जो वाहन की चोरी या वाहन से चोरी, घरेलू और व्यावसायिक चोरी, चाल चोरी, कार्गो अपराध, चोरी (चोरी का प्रयास, निजी संपत्ति की चोरी), संगठित चोरी से संबंधित नागरिकों के बीच असुरक्षा की सामान्य भावना पैदा करता है। जेब काटना, छीनना, दुकान से सामान चुराना या कार्ड स्किमिंग के माध्यम से चोरी करना और स्वचालित टेलर मशीन से चोरी करना या सार्वजनिक परिवहन प्रणाली में गैरकानूनी तरीके से धन प्राप्त करना या टिकटों की अवैध बिक्री और सार्वजनिक परीक्षा के प्रश्न पत्रों की बिक्री और संगठित आपराधिक समूहों द्वारा किए गए संगठित अपराध के ऐसे अन्य सामान्य रूप या गिरोह, छोटे संगठित अपराध का गठन करेंगे और इसमें उक्त अपराध शामिल होंगे जब मोबाइल संगठित अपराध समूहों या गिरोहों द्वारा किए जाते हैं जो संपर्क, एंकर पॉइंट और स्थानांतरित होने से पहले की अवधि में क्षेत्र में कई अपराधों को अंजाम देने के लिए आपस में संपर्क, एंकर पॉइंट और लॉजिस्टिक समर्थन का नेटवर्क बनाते हैं। चालू.
(2) जो कोई भी उप-धारा (1) के तहत कोई छोटा संगठित अपराध करेगा या करने का प्रयास करेगा, उसे कारावास से दंडित किया जाएगा जिसकी अवधि एक वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन जिसे सात साल तक बढ़ाया जा सकता है, और उत्तरदायी भी होगा सही करने के लिए।
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