: मोटापे को लेकर नई परिभाषा बीएमआई ही नहीं, कमर की माप से भी तय होगा मोटापा
Admin
Fri, Jan 17, 2025
मोटापे को लेकर नई परिभाषा
बीएमआई ही नहीं, कमर की माप से भी तय होगा मोटापा
न्यूयॉर्क, मोटापे को समझने और इलाज के लिए एक नया दृष्टिकोण सामने आया है, जो बाँडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की पुरानी पारंपरिक प्रणाली को चुनौती देता है। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस नए दृष्टिकोण में बीएमआई के बजाय शरीर के फैट और उससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से मोटापे को परिभाषित किया गया है। सबकुछ जानते हैं...
• मोटापे को लेकर नई परिभाषा क्यों दी गई है?
मोटापा अब सिर्फ बीएमआई के आधार पर नहीं मापा जाएगा। मोटापे को सही ढंग से समझने के लिए शरीर में मौजूद फैट की मात्रा और इससे होने वाली बीमारियों पर ध्यान देना जरूरी है। बीएमआई के आधार पर कई लोग गलत तरीके से मोटापे के मरीज माने जा रहे हैं, जबकि वे स्वस्थ हो सकते हैं।
• बीएमआई को क्यों सही नहीं माना गया ?
बीएमआई केवल वजन और लंबाई के आधार पर मोटापा तय करता है। लेकिन यह शरीर में फैट की सही मात्रा, फैट का वितरण और स्वास्थ्य की स्थिति नहीं बताता। कई बार ऐसे लोग जिनका बीएमआई सामान्य होता है, उनके शरीर में अधिक फैट होने के कारण वे गंभीर बीमारियों के खतरे में होते हैं।
• मोटापे की नई परिभाषा क्या है?
मोटापे को दो श्रेणियों में बांटा गया है-
1. प्री-क्लिनिकल मोटापाः जब बीएमआई 25 से अधिक हो और शरीर में अतिरिक्त फैट हो, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या न हो।
2. क्लिनिकल मोटापाः जब फैट से संबंधित परेशानी जैसे सांस फूलना, हृदय रोग, जोड़ों का दर्द आदि हो।
• मोटापे को मापने के नए तरीके क्या हैं?
बीएमआई के अलावा अब डॉक्टर टेप से कमर मापकर मोटापा का अनुमान लगाएंगे। यदि महिलाओं की कमर 34.6 इंच से ज्यादा और पुरुषों की 40 इंच से ज्यादा हो, तो इसका मतलब शरीर में अधिक फैट है।। डेक्सा स्कैन और कमर-लंबाई अनुपात जैसी तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
• इस नई परिभाषा से क्या फर्क पड़ेगा?
महंगी दवाओं का उपयोग केवल क्लिनिकल मोटापे वाले मरीजों तक सीमित किया जा सकता है। प्री- क्लिनिकल मोटापे वाले लोगों को वजन बढ़ने से रोकने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जाएगी। हालांकि, हार्वर्ड में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. डेविड एम. नाथन इसे अव्यवहारिक मानते हैं, क्योंकि यह सुझाव देती है कि जब तक स्वास्थ्य समस्याएं न हों, तब तक इलाज न किया जाए।
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