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100%”, “नेचुरल” जैसे शब्दों के झांसे में न आएँ : राज्यसभा में सांसद का बड़ा खुलासा खाने की हर चीज़ में मिलावट, देश के भविष्य पर सीधा खतरा

Ashwani Kumar Sinha

Sat, Dec 20, 2025

राज्यसभा में सांसद का बड़ा खुलासा

खाने की हर चीज़ में मिलावट, देश के भविष्य पर सीधा खतरा

नई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य ने उच्च सदन में देश में खाद्य पदार्थों में बढ़ती मिलावट को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि आज हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि बच्चे, युवा और बुजुर्ग—किसी की भी थाली सुरक्षित नहीं रही। सांसद ने इसे केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि देश के भविष्य का सवाल बताया।

किस वस्तु में कितनी मिलावट—छोटे अक्षरों की सच्चाई

सांसद ने सदन में बताया कि कई खाद्य उत्पादों में छोटे अक्षरों में लिखी जानकारी आम उपभोक्ता पढ़ ही नहीं पाता, जबकि वहीं असली सच्चाई छुपी होती है—

दूध और दूध उत्पाद: 20–40% तक सिंथेटिक या पानी की मिलावट

फ्रूट जूस: केवल 5–10% वास्तविक फल रस, शेष फ्लेवर, रंग और चीनी

बिस्कुट व पैकेज्ड स्नैक्स: 25–30% तक पाम ऑयल/हाइड्रोजेनेटेड फैट, अत्यधिक शुगर और नमक

खाने का तेल: 10–20% तक सस्ता औद्योगिक तेल या मिलावटी तत्व

मसाले: 15–30% तक रंग, लकड़ी का बुरादा या अन्य अपशिष्ट

मिठाइयाँ: सिंथेटिक खोया, हानिकारक रंग और केमिकल स्वीटनर

सांसद ने कहा कि यह सब कानूनी भाषा और छोटे अक्षरों में लिखा तो होता है, लेकिन आम आदमी की समझ और सेहत—दोनों के साथ छल है।

सबसे चौंकाने वाला सच

आप सांसद ने सदन में कहा,

“जो चीज़ें कंपनियाँ बाजार में बेच रही हैं, वही चीज़ें उनके मालिक खुद और अपने परिवार को नहीं खिलाते। वे शुद्ध और अलग उत्पाद इस्तेमाल करते हैं, लेकिन मिलावटी सामान पूरे देश में बेचा जा रहा है।”

बच्चों और बुजुर्गों पर सबसे बड़ा असर

उन्होंने बताया कि बच्चों में कमजोर इम्यूनिटी, हार्मोनल गड़बड़ी और बुजुर्गों में हृदय, लिवर व किडनी रोगों की बढ़ती संख्या का सीधा संबंध मिलावटी खानपान से है।

सरकार से तीखे सवाल

सांसद ने पूछा कि जब मिलावट सबको दिख रही है, तब खाद्य सुरक्षा एजेंसियाँ क्या कर रही हैं?

उन्होंने सख्त कानून, नियमित जांच और दोषी कंपनियों पर कड़ी सजा की मांग की।

आम आदमी खुद को कैसे बचाए

लेबल पर Ingredients और % Composition ध्यान से पढ़ें

“100%”, “नेचुरल” जैसे शब्दों के झांसे में न आएँ

स्थानीय और भरोसेमंद स्रोत से खाद्य सामग्री लें

बच्चों को पैकेज्ड जूस और स्नैक्स से दूर रखें

अत्यधिक चमकीले रंग और बहुत लंबे शेल्फ-लाइफ वाले उत्पादों से बचें

राज्यसभा में सांसद की यह बयानबाजी साफ संकेत है कि मिलावट अब छुपी हुई समस्या नहीं, बल्कि खुला खतरा बन चुकी है। यदि अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा पूरे देश की सेहत और भविष्य को भुगतना पड़ेगा।

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