सुरक्षा और मौलिक अधिकारों के सीधे उल्लंघन : बिना मान्यता चला माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, भोपाल — बाल अधिकार संरक्षण आयोग का औचक निरीक्षण, गंभीर अनियमितताएं उजागर
Ashwani Kumar Sinha
Fri, Jun 20, 2025
📰 बिना मान्यता चला माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, भोपाल — बाल अधिकार संरक्षण आयोग का औचक निरीक्षण, गंभीर अनियमितताएं उजागर
भोपाल, 19 जून 2025 — राजधानी भोपाल स्थित माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल में आज मध्यप्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की दो सदस्यीय टीम द्वारा औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण दल में माननीय सदस्य डॉ. निशा सक्सेना एवं माननीय सदस्य श्री अनुराग पाण्डेय उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान स्कूल में कई गंभीर विधिक एवं प्रशासनिक अनियमितताएं पाई गईं, जो बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) के उल्लंघन की श्रेणी में आती हैं।
🔍 मुख्य अनियमितताएं:
🏫 स्कूल बिना वैध मान्यता के संचालित पाया गया।
➤ स्कूल प्रबंधन द्वारा मान्यता नवीनीकरण (Renewal) नहीं कराया गया है, जो मध्यप्रदेश निजी विद्यालय नियम 2017 के अंतर्गत स्पष्ट उल्लंघन है।📘 RTE अधिनियम के तहत बच्चों को प्रवेश नहीं दिया गया।
➤ RTE Act, 2009 की धारा 12(1)(c) के तहत प्रत्येक निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय को 25% सीटों पर वंचित वर्ग के बच्चों को नि:शुल्क प्रवेश देना अनिवार्य है।🔥 अग्निसुरक्षा उपकरण (Fire Safety Equipment) एक्सपायर पाए गए।
➤ राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) एवं स्कूल सुरक्षा मानकों के अंतर्गत यह एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना जाता है।🔁 विद्यालय के दो अलग-अलग DISE कोड पाए गए।
➤ यह दर्शाता है कि प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही में गंभीर त्रुटियां हैं, जिससे सरकारी आंकड़ों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है।🧑🏫 शिक्षा विभाग के अधिकारी भी निरीक्षण में रहे उपस्थित
➤ निरीक्षण के समय BRC (ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर) एवं जन शिक्षक (Cluster Resource Person) उपस्थित रहे, जिन्होंने प्रकरण का स्थल पर सत्यापन किया।
⚖️ विधिक प्रावधानों के अंतर्गत प्रभाव:
मध्यप्रदेश निजी विद्यालय अधिनियम 2017 की धारा 5 एवं 9 का उल्लंघन।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act, 2009) की धारा 18(1) के तहत बिना मान्यता स्कूल चलाना दंडनीय अपराध है।
स्कूल सुरक्षा दिशा-निर्देश 2014 एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के मापदंडों का उल्लंघन।
📣 बाल आयोग की चेतावनी और अगली कार्यवाही
बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने विद्यालय प्रबंधन को स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी करने की अनुशंसा की है। साथ ही यह भी निर्देशित किया है कि:
जब तक स्कूल मान्यता प्राप्त नहीं कर लेता, शिक्षण गतिविधियों पर रोक लगाने पर विचार किया जाए।
जिला शिक्षा अधिकारी को मामले की पूर्ण जाँच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएं।
अग्निसुरक्षा और RTE अनुपालन की पुनः भौतिक पुष्टि की जाए।
📌 निष्कर्ष:
यह मामला यह दर्शाता है कि कई निजी संस्थान शिक्षा की गुणवत्ता और वैधानिक जिम्मेदारियों की उपेक्षा कर रहे हैं, जो बच्चों के सुरक्षा और मौलिक अधिकारों के सीधे उल्लंघन
की स्थिति उत्पन्न करता है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग इस गंभीर अनियमितता पर क्या ठोस कार्यवाही करता है।
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