योगदान की झलक : गुरुजी" माधव सदाशिव गोलवलकर की पुण्यतिथि पर राष्ट्र श्रद्धा से नमन
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Jun 5, 2025
📰 "गुरुजी" माधव सदाशिव गोलवलकर की पुण्यतिथि पर राष्ट्र श्रद्धा से नमन
📅 5 जून 2025 | नागपुर / नई दिल्ली
आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधव सदाशिवराव गोलवलकर, जिन्हें सम्पूर्ण संघ परिवार स्नेह और श्रद्धा से "गुरुजी" कहकर संबोधित करता है, की 52वीं पुण्यतिथि देशभर में श्रद्धा और राष्ट्रनिष्ठ भाव से मनाई जा रही है।
🔹 जीवन परिचय:
जन्म: 19 फ़रवरी 1906, रामटेक (महाराष्ट्र)
निधन: 5 जून 1973, नागपुर
शिक्षा: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से विज्ञान और कानून में अध्ययन, इसके बाद रामकृष्ण मिशन में साधु जीवन का प्रशिक्षण लिया।
संघ से जुड़ाव: 1932 में RSS से सक्रिय रूप से जुड़े, और 1940 में डॉ. हेडगेवार के निधन के पश्चात द्वितीय सरसंघचालक बने।
🔹 योगदान की झलक:
गुरुजी का व्यक्तित्व गूढ़ विचारशीलता, तेजस्वी नेतृत्व और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उनके कार्यकाल में संघ को देशभर में विस्तृत आयाम मिला और यह एक प्रभावशाली सांस्कृतिक आंदोलन बन गया।
उन्होंने संघ के अनुशासन, शाखा पद्धति और विस्तार योजना को व्यवस्थित किया।
उनके समय में संघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक से राष्ट्र सेवक बनने की भावना को आकार दिया।
गुरुजी के नेतृत्व में ही संघ ने 1947 के विभाजन के समय व्यापक राहत और पुनर्वास कार्य किए।
उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुषांगिक संगठनों को जन्म दिया, जिनमें भारतीय मजदूर संघ, विद्यार्थी परिषद, जनसंघ, विश्व हिन्दू परिषद प्रमुख हैं।
🔹 विचार और दर्शन:
गुरुजी का मानना था कि –
"राष्ट्र की एकता का आधार केवल भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि उसकी संस्कृति, परंपरा और आत्मा होती है।"
उनकी पुस्तक "बंच ऑफ थॉट्स" आज भी संघ विचारधारा की मूल पुस्तक मानी जाती है।
🔹 पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम:
आज उनकी पुण्यतिथि पर नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में श्रद्धांजलि सभा, शाखा विशेष कार्यक्रम, राष्ट्र भक्ति गीत और विचार गोष्ठियां आयोजित की गईं। पूरे देश में स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य, रक्तदान, वृक्षारोपण और जनजागरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें स्मरण किया।
संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने अपने संदेश में कहा –
"गुरुजी ने जिस राष्ट्र जीवन की कल्पना की, वह आत्मनिर्भर, आत्मगौरवपूर्ण और संस्कृति से जुड़ा भारत है। आज उनके विचार हमें मार्गदर्शन देते हैं।"
🔹 निष्कर्ष:
गुरुजी का जीवन एक आदर्श पथ था – निष्काम कर्म, राष्ट्र आराधना और चरित्र निर्माण का। उनकी पुण्यतिथि पर संकल्प लिया जा रहा है कि हम भारत को एक सशक्त, समरस और सांस्कृतिक राष्ट्र के रूप में पुनः प्रतिष्ठित करेंगे।
🙏 गुरुजी को कोटि-कोटि नमन।
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