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सरस्वती पूजा—अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा का उत्सव है। : सरस्वती देवी को ज्ञान, बुद्धि, वाणी, विवेक, संगीत और सृजन की अधिष्ठात्री देवी माना गया है

Ashwani Kumar Sinha

Fri, Jan 23, 2026

सरस्वती पूजा क्यों मनाई जाती है?

सरस्वती देवी को ज्ञान, बुद्धि, वाणी, विवेक, संगीत और सृजन की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। वे मनुष्य के भीतर छिपी अज्ञानता, भ्रम और अहंकार को दूर कर सत्-चेतना जागृत करती हैं।

ऋग्वेद, यजुर्वेद और उपनिषदों में “सरस्वती” को ज्ञान की दिव्य धारा कहा गया है, जो मन को शुद्ध कर सत्य की ओर प्रवाहित करती है।

आध्यात्मिक रहस्य

सरस्वती श्वेत वस्त्र धारण करती हैं — यह शुद्धता और सात्त्विकता का प्रतीक है

वीणा — मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन का संकेत

हंस — विवेक, सही-गलत के भेद की शक्ति

पुस्तक — ज्ञान का सतत अभ्यास

यह पूजा बताती है कि ज्ञान केवल सूचना नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और चरित्र निर्माण का साधन है।

क्या सरस्वती पूजा मनानी चाहिए?

हाँ, क्योंकि—

यह विद्या के प्रति श्रद्धा जगाती है

बच्चों और युवाओं में एकाग्रता, नैतिकता और विवेक विकसित करती है

समाज को यह स्मरण कराती है कि ज्ञान के बिना शक्ति विनाशकारी होती है

सरस्वती पूजा अंधविश्वास नहीं, बल्कि ज्ञान-संस्कार का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक पर्व है।

जिस राष्ट्र में ज्ञान की पूजा होती है, वही राष्ट्र दीर्घकाल तक सशक्त और सभ्य रहता है।

सरस्वती पूजा—अज्ञान से ज्ञान की ओर यात्रा का उत्सव है।

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