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हालांकि, व्यावहारिक दृष्टि से कई मामलों में पहले सत्र न्यायालय जाना : अग्रिम जमानत के लिए पहले सत्र न्यायालय जाना अनिवार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Aug 11, 2025

अग्रिम जमानत के लिए पहले सत्र न्यायालय जाना अनिवार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली | विधि संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) के लिए आरोपी को पहले सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाना जरूरी नहीं है। आरोपी सीधे उच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल कर सकता है।

मामले का कानूनी आधार

अदालत ने कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 438 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो याचिकाकर्ता को पहले सत्र न्यायालय में जाने के लिए बाध्य करे। कानून के अनुसार, अग्रिम जमानत की अर्जी सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय, किसी भी मंच पर सीधे दायर की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

पीठ ने कहा—

"यह एक वैकल्पिक अधिकार है, बाध्यता नहीं। आरोपी के पास यह स्वतंत्रता है कि वह किस न्यायालय में पहले आवेदन करना चाहता है।"

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर याचिका स्वीकार या खारिज करने का विवेकाधिकार रखता है, लेकिन आवेदन सीधे उच्च न्यायालय में करने पर उसे तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता।

प्रभाव और महत्व

  • कानूनी स्पष्टता: इस फैसले से देशभर में एकरूपता आएगी, क्योंकि कई राज्यों में पहले सत्र न्यायालय से होकर जाने की परंपरा थी।

  • समय की बचत: आरोपी सीधे उच्च न्यायालय जाकर जल्द राहत पाने की कोशिश कर सकता है।

  • अधिकार की सुरक्षा: कानून के तहत आरोपी के अधिकारों को मजबूती मिलती है।

विशेषज्ञ की राय

वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि यह आदेश न्यायिक प्रक्रिया में लचीलापन लाता है और अनावश्यक देरी को रोकता है। हालांकि, व्यावहारिक दृष्टि से कई मामलों में पहले सत्र न्यायालय जाना रणनीतिक रूप से लाभकारी भी हो सकता है।

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