पहली बार 25 जून 2025 से : संविधान हत्या दिवस: 25 जून को क्यों और किसके कहने पर मनाया जा रहा है?
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Jun 25, 2025
📰 संविधान हत्या दिवस: 25 जून को क्यों और किसके कहने पर मनाया जा रहा है?
📍 स्थान: नई दिल्ली | 📅 दिनांक: 25 जून 2025
भारत सरकार ने वर्ष 2025 से 25 जून को "संविधान हत्या दिवस" (Samvidhan Hatya Diwas) के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। यह निर्णय आपातकाल (Emergency) की 50वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में लिया गया है, जिससे वर्ष 1975 में भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक ढांचे पर गंभीर प्रभाव पड़ा था।
📜 ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के अंतर्गत देश में आपातकाल (Emergency) लागू किया गया। इस निर्णय के परिणामस्वरूप:
मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए,
विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी,
प्रेस की स्वतंत्रता पर सेंसरशिप,
न्यायपालिका पर हस्तक्षेप, और
संवैधानिक संस्थाओं को निष्क्रिय कर दिया गया।
इसी दिन को अब केंद्र सरकार ने "संविधान हत्या दिवस" के रूप में मनाने का निर्णय लिया है ताकि जनता को उस समय हुए लोकतंत्र के हनन की स्मृति दिलाई जा सके।
📢 भारत सरकार का निर्णय:
गृह मंत्रालय द्वारा 11 जुलाई 2024 को जारी अधिसूचना के अनुसार,
➤ 25 जून 2025 से 25 जून 2026 तक "संविधान हत्या दिवस" के रूप में देशभर में जन-जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।
➤ इस दौरान प्रदर्शनी, व्याख्यान, नाटक, डॉक्यूमेंट्री फिल्म शो, पोस्टर अभियान, और शैक्षणिक संगोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा।
➤ युवाओं और छात्रों में लोकतंत्र और संविधान के प्रति चेतना बढ़ाने का उद्देश्य प्रमुख है।
🗣️ सरकार के वक्तव्य:
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि “आपातकाल के दौरान भारत के लोकतंत्र की आत्मा को कुचलने का जो प्रयास हुआ था, उसे याद कर आज की पीढ़ी को लोकतंत्र की कीमत समझाना जरूरी है।”
25 जून 2025 को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम से ‘लोकतंत्र अमर रहे यात्रा’ की शुरुआत होगी।
⚠️ विपक्ष की प्रतिक्रिया:
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस दिवस को "राजनीतिक नौटंकी" बताते हुए कहा कि “यह संविधान की हत्या नहीं, बल्कि इतिहास का दुरुपयोग है।” उन्होंने इसे "बीजेपी की पाखंडी राजनीति" बताया और राज्य में इसे न मनाने की घोषणा की।
कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार की इस पहल को "हेडलाइंस बनाने की चाल" करार दिया और कहा कि यह “वर्तमान संवैधानिक संकटों से ध्यान भटकाने का प्रयास” है।
🔍 क्या कहता है विशेषज्ञ पक्ष:
विषय | विवरण |
|---|---|
दिन | 25 जून (हर वर्ष) |
पहली बार | 25 जून 2025 से |
घोषणा | भारत सरकार, गृह मंत्रालय (11 जुलाई 2024 अधिसूचना) |
कारण | 1975 के आपातकाल में संविधान, लोकतंत्र और अधिकारों का उल्लंघन |
प्रमुख कार्यक्रम | प्रदर्शनी, व्याख्यान, छात्र संवाद, नाटक, यात्रा |
प्रतिक्रिया | कुछ राज्यों ने समर्थन किया, कुछ ने विरोध किया (जैसे पश्चिम बंगाल) |
✅ निष्कर्ष:
"संविधान हत्या दिवस" का उद्देश्य 1975 में हुए आपातकाल की ऐतिहासिक सच्चाई को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाना है। यह पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं के महत्व, संविधान की गरिमा और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक समझी जा रही है। हालांकि इस विषय पर राजनीतिक मतभेद भी सामने आए हैं, फिर भी यह पहल भारत के लोकतांत्रिक इतिहास की एक निर्णायक स्मृति को पुनः जीवंत करने का प्रयास है।
स्रोत:
भारत सरकार गृह मंत्रालय अधिसूचना (11 जुलाई 2024)
NDTV, Times of India, नवभारत टाइम्स, सरकारी वेबसाइट: dhar.nic.in
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