अप्प दीपो भवः” – स्वयं अपने दीपक बनो, यही बुद्ध का अमर संदेश है : बुद्ध पूर्णिमा – शांति, करुणा और ज्ञान का पावन पर्व भारत सहित विश्व
Ashwani Kumar Sinha
Fri, May 1, 2026
बुद्ध पूर्णिमा – शांति, करुणा और ज्ञान का पावन पर्व भारत सहित विश्व
आज पूरे देश और विश्व में बुद्ध पूर्णिमा श्रद्धा, आस्था और शांति के संदेश के साथ मनाई जा रही है। यह पर्व भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण—तीनों महत्वपूर्ण घटनाओं की स्मृति में मनाया जाता है, इसलिए इसका विशेष महत्व है।
बुद्ध पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती है?
बुद्ध पूर्णिमा हर वर्ष वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इसी दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और इसी दिन उन्होंने महापरिनिर्वाण भी प्राप्त किया।
भगवान बुद्ध ने मानव जीवन के दुखों का कारण और उससे मुक्ति का मार्ग बताया, जिसे मध्यम मार्ग और अष्टांगिक मार्ग के रूप में जाना जाता है।
भगवान बुद्ध का संक्षिप्त जीवन परिचय
भगवान बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व में लुंबिनी (वर्तमान नेपाल) में हुआ था। उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उन्होंने संसार के दुखों को देखकर राजमहल का त्याग किया और कठोर साधना के बाद बोधगया में पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त किया।
उनकी शिक्षाओं में अहिंसा, करुणा, सत्य और आत्मसंयम प्रमुख हैं।
देशभर में कैसे मनाया जा रहा है पर्व?
बौद्ध मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना
भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण
धम्म पाठ और प्रवचन
शांति रैलियां और ध्यान कार्यक्रम
गरीबों को दान और सेवा कार्य
विशेष रूप से बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर जैसे पवित्र स्थलों पर भव्य आयोजन किए जा रहे हैं।
बुद्ध पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता के लिए मार्गदर्शन है। आज के समय में जब हिंसा और तनाव बढ़ रहा है, भगवान बुद्ध का संदेश—
“अहिंसा, शांति और करुणा”—और भी प्रासंगिक हो गया है।
बुद्ध पूर्णिमा हमें सिखाती है कि सच्ची खुशी बाहरी साधनों में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति और संतुलन में है। यह पर्व हर व्यक्ति को सही मार्ग पर चलने और समाज में प्रेम व सद्भाव फैलाने की प्रेरणा देता है।
“अप्प दीपो भवः” – स्वयं अपने दीपक बनो, यही बुद्ध का अमर संदेश है।
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