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पुलिस जांच और अदालतों द्वारा साक्ष्य के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धारा 27 में संयुक्त खुलासे तभी मान्य जब अलग-अलग नई खोज हो

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Apr 28, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: धारा 27 में संयुक्त खुलासे तभी मान्य जब अलग-अलग नई खोज हो

नई दिल्ली, 28 अप्रैल 2026। सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिया है कि कई आरोपियों द्वारा दिए गए संयुक्त (joint) या एक साथ किए गए खुलासे के बयान तभी स्वीकार्य होंगे, जब उनसे अलग-अलग और नई प्रासंगिक तथ्य (discovery) सामने आएं।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने यह फैसला कर्नाटक के एक हत्या मामले में सुनाया, जिसमें दो दोषियों की अपील पर सुनवाई करते हुए अंततः उन्हें बरी कर दिया गया।

क्या था मामला

यह मामला वर्ष 2013 में कर्नाटक में एक महिला के अपहरण और हत्या से जुड़ा था। अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने कर्ज से बचने के लिए महिला की हत्या कर शव को जला दिया। ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

कोर्ट की प्रमुख टिप्पणियां

संयुक्त बयान स्वतः अस्वीकार्य नहीं, लेकिन उनमें स्पष्टता और विशिष्टता जरूरी है।

किसी तथ्य की “खोज” (Discovery) केवल एक बार ही हो सकती है।

यदि पुलिस को पहले से ही जानकारी है, तो बाद में दिया गया वही बयान धारा 27 के तहत मान्य नहीं होगा।

अलग-अलग आरोपियों के बयान तभी मान्य होंगे जब वे अलग-अलग स्थानों या तथ्यों की नई खोज कराएं।

पंच गवाह द्वारा आरोपियों के अलग-अलग बयानों की पुष्टि न होने पर ऐसे साक्ष्य कमजोर माने जाएंगे।

‘लास्ट सीन’ सिद्धांत पर भी टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि केवल “आखिरी बार साथ देखे जाने (Last Seen)” का सबूत, बिना अन्य ठोस साक्ष्य के, दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है और इस आधार पर सजा देना “बहुत जोखिम भरा” है।

नतीजा

साक्ष्यों की कड़ी कमजोर होने और स्वतंत्र पुष्टि के अभाव में सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि को रद्द कर दिया और आरोपियों को बरी कर दिया।

कानूनी महत्व

यह फैसला स्पष्ट करता है कि:

धारा 27 के तहत साक्ष्य की विश्वसनीयता “नई खोज” पर निर्भर करती है,

और संयुक्त खुलासों का उपयोग तभी होगा जब हर आरोपी का योगदान अलग-अलग साबित हो।

यह निर्णय भविष्य में आपराधिक मामलों में पुलिस जांच और अदालतों द्वारा साक्ष्य के मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करेगा।

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