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: परमात्मा के प्रति डर को जाने

Admin

Sun, Apr 7, 2024
आन्तरिक बल
परमात्मा के प्रति डर पैदा कर दिया गया है ! अगर प्रसाद नहीं लिया तो ईश्वर नाराज हो जाएगा ! शुक्रवार को व्रत रखा तो खट्टा न खाएं, शनिवार को बाल न कटवाएं, किसी विशेष दिन पर तेल न ख़रीदे, नही तो ईश्वर नाराज हो जाएगा ! सच यह है कि भगवान प्यार का सागर है ! भगवान हमें सदा प्यार ही करता है ! गर्मी के मास में हम चाय ही चाय पीते रहें तो एसिडिटी बढ़ जाएगी ! सर्दी में हम शरबत पीते रहें तो शरीर जकड़ जाएगा ! मौसम की प्रकृति अनुसार जो आप को सूट करता है वह चीजे खाएं ताकि आप को शारीरिक बल मिलता रहे ! भगवान को याद करते रहें ! आप का मनोबल बना रहेगा ! परमात्मा से तो हमारा सम्बन्ध प्रेम हा है, डर का नहीं ! प्रार्थना तो प्रेम का सहज परिणाम है ! प्रार्थना करनी नही पड़ती, सहज निकलती है ! प्रार्थना के लिए किसी मंदिर-मस्जिद की आवश्कयता नहीं पड़ती, जहां भी हम प्रार्थनामय हुए मंदिर भी वहीं, मस्जिद भी वहीं है ! प्रार्थना के लिए किसी हवन कुंड या यज्ञ के सामग्री की आवश्कयता नहीं ! जिस क्षण भी हम प्रार्थनामय हुए, उसी क्षण हमारे भीतर हवन-अग्नि जली और उस अग्नि में सामग्री नहीं, हमारा अहंकार जलेगा ! प्रार्थना तो निशब्द पुकार है ! भाव है ह्रदय का ! प्रभु के प्रति प्यास ! धन्यवाद का भाव है ! -जीवन को नई दिशा दे............

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