आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बिना समग्र स्वास्थ्य अधूरा : डॉ. पुण्डरीक गो. : भोपाल आरोग्य भारती व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव संपन्न
Ashwani Kumar Sinha
Thu, Sep 10, 2026
आध्यात्मिक स्वास्थ्य के बिना समग्र स्वास्थ्य अधूरा : डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी
आरोग्य भारती व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव संपन्न
भोपाल। आरोग्य भारती मध्य भारत प्रांत की मासिक व्याख्यानमाला का 12वां वार्षिकोत्सव गुरुवार को रवीन्द्र भवन स्थित हंसध्वनि सभागार में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विषय “सर्व समावेशी स्वास्थ्य के लिए आध्यात्मिक स्वास्थ्य आवश्यक है” रहा। वक्ताओं ने स्वास्थ्य के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक आयामों पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध चिंतक एवं कथावाचक परम पूज्य डॉ. पुण्डरीक गोस्वामी जी ने शास्त्रों एवं वेदों के संदर्भों के माध्यम से आध्यात्मिक स्वास्थ्य के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि केवल शरीर का स्वस्थ होना ही पूर्ण स्वास्थ्य नहीं है। स्वस्थ जीवन के लिए शरीर के साथ मन और आंतरिक चेतना का संतुलन भी आवश्यक है। उन्होंने रोग के उपचार के साथ उसके मूल कारणों पर ध्यान देने तथा निवारक स्वास्थ्य पद्धति एवं स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।
मुख्य अतिथि मध्यप्रदेश विधानसभा अध्य
क्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने आरोग्य भारती द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की और व्याख्यानमाला के 12 वर्ष पूर्ण होने पर कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं।
सारस्वत अतिथि आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय जी ने संगठन की संरचना, उद्देश्य, कार्यपद्धति एवं चार प्रमुख स्तंभों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आरोग्य भारती का उद्देश्य उपचार के साथ-साथ समाज में स्वस्थ जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
कार्यक्रम का स्वागत उद्बोधन डॉ. मिहिर कुमार जी ने दिया। कार्यक्रम में चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, विद्यार्थियों एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक नागरिकों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम में “आरोग्यम् मम् स्वभावः, अधिकारः, कर्तव्यं च” अर्थात “मेरा स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी” के संदेश के माध्यम से स्वास्थ्य को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ सामाजिक दायित्व के रूप में अपनाने का आह्वान किया गया।
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