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पहले हमें बता दो, खुशी किसे कहते हैं? फिर पूछना कि हम खुश हैं या नहीं! : खुश रहो लेकिन कैसे? मध्यप्रदेश का 'हैप्पीनेस इंडेक्स' खुद ही इंतज़ार में

Ashwani Kumar Sinha

Thu, May 8, 2025


"खुश रहो लेकिन कैसे? मध्यप्रदेश का 'हैप्पीनेस इंडेक्स' खुद ही इंतज़ार में!"

भोपाल से अश्वनी कुमार सिन्हा की रिपोर्ट

"खुशी का फॉर्मूला खोजा नहीं गया, 7 साल से सर्वे अटका पड़ा है!"

साल 2017-18 में जब मध्यप्रदेश ने GDP की तर्ज पर ‘हैप्पीनेस इंडेक्स’ बनाने का सपना देखा, तो पूरा देश चौंका – आखिर खुशी को भी मापा जा सकता है? हां! लेकिन 7 साल बीत गए और आज तक हम ये तय नहीं कर पाए कि पूछें तो पूछें क्या?

राज्य आनंद संस्थान और IIT खड़गपुर ने मिलकर योजना बनाई, कुछ गांव-कस्बों का दौरा भी किया, 40 लाख का बजट भी तय हुआ... लेकिन फिर सवालों की लिस्ट ही सवाल बन गई। प्रश्नावली में 100 सवाल जो होने थे – वो अब भी ‘पेंडिंग’ है!

कोविड आया, सरकार बदली, और खुशी फाइलों में गुम हो गई।

अब एक बार फिर कोशिश हो रही है। डायरेक्टर सत्यप्रकाश आर्य कहते हैं, “साल के अंत तक सर्वे शुरू कर देंगे।” IIT खड़गपुर अब भी इस मिशन में साथ है।

क्या पूछे जाएंगे सवाल?

  • क्या आप अपने जीवन से खुश हैं?

  • मुसीबत में मदद कौन करता है?

  • मोबाइल ज्यादा जरूरी या मेडिटेशन?

  • बुजुर्गों से बॉन्डिंग कैसी है?

  • और सबसे बड़ा सवाल: आपको सबसे ज्यादा खुशी किससे मिलती है?

10,000 से ज्यादा लोग, हर जिले से, हर उम्र से इस सर्वे का हिस्सा बनेंगे।

जनता कहती है:
"पहले हमें बता दो, खुशी किसे कहते हैं? फिर पूछना कि हम खुश हैं या नहीं!"

लेकिन सच ये भी है कि ये योजना अगर पूरी हुई तो ये सिर्फ आंकड़े नहीं होंगे, बल्कि सरकार के लिए नागरिकों की असली ‘वेलनेस रिपोर्ट’ होगी।

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