जीवन की दौड़ में लगातार आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन समय-समय पर रुककर : भागदौड़ के बीच ‘अल्पविराम’ ने सिखाया स्वयं से संवाद, तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण का समापन
Ashwani Kumar Sinha
Wed, Aug 19, 2026

भागदौड़ के बीच ‘अल्पविराम’ ने सिखाया स्वयं से संवाद, तीन दिवसीय आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण का समापन
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्य आनंद संस्थान के सहयोग से मध्यप्रदेश जल एवं भूमि प्रबंधन संस्थान (वाल्मी), भोपाल में 17 से 19 अगस्त तक आयोजित तीन दिवसीय ‘आनंदम सहयोगी प्रशिक्षण कार्यक्रम’ का बुधवार को समापन हुआ। कार्यक्रम का प्रमुख केंद्र ‘अल्पविराम—स्वयं से मुलाकात’ रहा, जिसमें प्रतिभागियों को रोजमर्रा की भागदौड़ से कुछ समय रुककर स्वयं के विचारों, भावनाओं, व्यवहार, संबंधों और जीवन की दिशा को समझने का अवसर मिला।
‘अल्पविराम’ की मूल भावना केवल काम से विराम लेना नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर झांकना, अपने अनुभवों को समझना और जीवन में आनंद के वास्तविक स्रोतों को पहचानना है। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को आत्मचिंतन, संवाद, सुनने-समझने, संबंधों में सुधार, सकारात्मक दृष्टिकोण तथा प्रकृति और आसपास के जीवन से जुड़ने जैसी गतिविधियों के माध्यम से स्वयं को देखने का अवसर दिया गया।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रतिभागियों में यह समझ विकसित करना रहा कि आनंद केवल बाहरी उपलब्धियों या परिस्थितियों पर निर्भर नहीं है। व्यक्ति अपने विचार, दृष्टिकोण, व्यवहार और संबंधों में सकारात्मक बदलाव लाकर भी जीवन में अधिक संतोष और आनंद का अनुभव कर सकता है। इसी सोच के साथ ‘अल्पविराम’ व्यक्ति को कुछ समय रुकने, स्वयं को सुनने और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने की प्रेरणा देता है।
कार्यशाला में विभिन्न संवादात्मक एवं अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपने जीवन के अनुभवों पर विचार किया। ‘मैं क्या सोचता हूं, क्या महसूस करता हूं, मेरे व्यवहार का दूसरों पर क्या प्रभाव पड़ता है और मेरे लिए वास्तव में महत्वपूर्ण क्या है’ जैसे प्रश्नों पर आत्ममंथन इस प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण प्रक्रिया रही।
समापन में साझा हुए अनुभव
समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने तीन दिनों के अनुभव साझा करते हुए बताया कि व्यस्त जीवन में स्वयं के लिए समय निकालना भी आवश्यक है। ‘अल्पविराम’ ने उन्हें अपनी दिनचर्या से अलग हटकर स्वयं को समझने और रिश्तों तथा जीवन के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर दिया।
कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रवीण गंगराड़े जी, सीईओ, राज्य आनंद संस्थान, अभिषेक जी, कार्यक्रम संयोजक, सत्य प्रकाश जी, कार्यक्रम निदेशक, प्रदीप जी, शिक्षक सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट रहा—जीवन की दौड़ में लगातार आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन समय-समय पर रुककर स्वयं से मिलना भी उतना ही
जरूरी है। यही ‘अल्पविराम’ है।
मध्यप्रदेश में आनंद एवं सकारात्मक जीवन-दृष्टि से जुड़े प्रयासों का उद्देश्य व्यक्ति और समाज में बेहतर संवाद, सहभागिता तथा सकारात्मक वातावरण को बढ़ावा देना है। राज्य स्तर पर प्रशिक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाने की पहल भी की जा रही है।
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