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न्याय की प्रक्रिया में त्रुटि को सुधारने के लिए तत्पर : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर लिया स्वतः संज्ञान

Ashwani Kumar Sinha

Wed, Mar 26, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के विवादित फैसले पर लिया स्वतः संज्ञान

नई दिल्ली, 26 मार्च 2025 — सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक विवादास्पद फैसले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई करने का निर्णय लिया है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में 11 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित है।

मामले का विवरण:

आरोपियों पवन और आकाश पर आरोप है कि उन्होंने 11 वर्षीय पीड़िता के साथ अनुचित व्यवहार किया, उसके कपड़े फाड़ने की कोशिश की और उसे पुलिया के नीचे ले जाने का प्रयास किया। हालांकि, एक राहगीर के आने से आरोपी फरार हो गए। ट्रायल कोर्ट ने इस कृत्य को पॉक्सो एक्ट की धारा 18 (अपराध करने का प्रयास) के साथ धारा 376 (बलात्कार) के तहत माना और आरोपियों के खिलाफ समन जारी किया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का निर्णय:

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना, उसके पायजामे की डोरी तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के अपराध के अंतर्गत नहीं आता। इसके बजाय, यह कृत्य आईपीसी की धारा 354-बी (नंगा करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग) और पॉक्सो एक्ट की धारा 9/10 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत आता है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप:

इस फैसले पर व्यापक आलोचना और असहमति व्यक्त की गई। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी, राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल और कानूनी विशेषज्ञों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की। इन प्रतिक्रियाओं के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।

समाज की प्रतिक्रिया:

इस फैसले के बाद समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश और असंतोष देखा गया है। कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस निर्णय की आलोचना की है और इसे न्याय के प्रति संवेदनहीनता का प्रतीक बताया है।

निष्कर्ष:

सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में हस्तक्षेप से यह स्पष्ट होता है कि न्यायपालिका ऐसे संवेदनशील मामलों में सतर्क है और न्याय की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारने के लिए तत्पर है। आगामी सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में अंतिम निर्णय देगा, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करेगा।

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