हार्टअटैक अचानक नहीं बल्कि वर्षों अस्वस्थ आदतों का परिणाम : बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा हृदय रोगों का खतरा, समय रहते अपनाएँ स्वस्थ आदतें
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jun 30, 2026
बदलती जीवनशैली से बढ़ रहा हृदय रोगों का खतरा, समय रहते अपनाएँ स्वस्थ आदतें
भोपाल। चिकित्सा विज्ञान में अभूतपूर्व प्रगति, अत्याधुनिक अस्पतालों, उन्नत उपचार पद्धतियों और बेहतर दवाओं के बावजूद विश्वभर में हृदय रोगों, विशेषकर हार्ट अटैक के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका प्रमुख कारण चिकित्सा सुविधाओं की कमी नहीं, बल्कि तेजी से बदलती अस्वस्थ जीवनशैली है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), World Heart Federation की World Heart Report 2023 तथा Institute for Health Metrics and Evaluation (IHME) के Global Burden of Disease (GBD) Study के अनुसार, इस्केमिक हृदय रोग आज भी विश्व में मृत्यु के प्रमुख कारणों में शामिल है। पिछले कई दशकों में इससे होने वाली वार्षिक मौतों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक प्रोसेस्ड एवं पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, अपर्याप्त नींद, लगातार मानसिक तनाव, धूम्रपान एवं तंबाकू का उपयोग, बढ़ता मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा प्रकृति से दूर होती जीवनशैली हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारक हैं। हार्ट अटैक अधिकांश मामलों में अचानक नहीं होता, बल्कि वर्षों तक बनी रहने वाली अस्वस्थ आदतों का परिणाम होता है।
चिकित्सकों का मानना है कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम या प्रतिदिन 30–45 मिनट की पैदल चाल, 7–8 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद, योग, प्राणायाम एवं ध्यान, तंबाकू और धूम्रपान से पूर्ण दूरी तथा रक्तचाप, रक्त शर्करा एवं कोलेस्ट्रॉल की नियमित जाँच से हृदय रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण कराने की अपील करते हुए कहा है कि स्वस्थ हृदय ही दीर्घायु, सक्रिय और सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूँजी है।
विज्ञापन