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खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी जिलों के अधिकारियों को इन निर्देशों का : मिलावटी व सिंथेटिक दूध के खिलाफ मध्यप्रदेश में विशेष अभियान

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jul 20, 2026

मिलावटी व सिंथेटिक दूध के खिलाफ मध्यप्रदेश में विशेष अभियान

खाद्य सुरक्षा आयुक्त ने सभी जिलों को दिए सघन निरीक्षण, सैंपलिंग और संयुक्त कार्रवाई के निर्देश

भोपाल, 20 जुलाई 2026। महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में मिलावटी एवं सिंथेटिक दूध के निर्माण और उसके संगठित नेटवर्क के उजागर होने के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भी दूध में मिलावट रोकने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं।

कार्यालय आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश द्वारा जारी आदेश में सभी जिलों के अभिहित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से दूध एवं दुग्ध उत्पादों की विशेष निगरानी, सघन निरीक्षण और सैंपलिंग अभियान संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का उद्देश्य प्रदेशवासियों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराना तथा मिलावटी, सिंथेटिक एवं नकली दूध के निर्माण, भंडारण और विक्रय पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

निर्देशों के अनुसार प्रत्येक जिले में दूध चिलिंग प्लांट, डेयरी इकाइयों, दूध संग्रहण केंद्रों, दूध निर्माण इकाइयों, थोक विक्रेताओं तथा अन्य संबंधित खाद्य व्यवसाय संचालकों का व्यापक निरीक्षण किया जाएगा। संदेहास्पद दूध एवं दुग्ध उत्पादों के पर्याप्त नमूने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के अनुसार लिए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान मिलावटी अथवा दूषित दूध पाए जाने पर संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध जप्ती, सीलिंग तथा अन्य आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

प्राथमिक स्तर पर दूध की गुणवत्ता और मिलावट की जांच मोबाइल फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी तथा मैजिक बॉक्स के माध्यम से भी कराई जाएगी। यदि कहीं सिंथेटिक दूध, नकली दूध या अन्य प्रकार की खाद्य अपमिश्रण संबंधी गतिविधि पाई जाती है, तो संबंधित खाद्य व्यवसाय संचालक के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा अन्य प्रचलित विधिक प्रावधानों के तहत तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

आदेश में स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर संयुक्त कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अभियान के दौरान किए गए निरीक्षण, लिए गए नमूनों, त्वरित परीक्षणों तथा की गई वैधानिक कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन 31 जुलाई 2026 तक मुख्यालय को भेजना अनिवार्य किया गया है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने सभी जिलों के अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि प्रदेश में दूध की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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