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यह फैसला बताता है कि कानून संवेदनशील भी है और न्यायसंगत भी : पोक्सो एक्ट मामलों में अब शब्दों के नहीं, मंशा के आधार पर होगी जांच

Ashwani Kumar Sinha

Tue, Jul 1, 2025


📰 “आई लव यू” कहना यौन अपराध नहीं — बॉम्बे हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
संवेदनशील मामलों में अब शब्दों के नहीं, मंशा के आधार पर होगी जांच

नागपुर, 30 जून 2025:
बॉम्बे हाई कोर्ट (नागपुर खंडपीठ) ने हाल ही में एक बेहद अहम फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी नाबालिग लड़की को "आई लव यू" कहना अपने आप में यौन उत्पीड़न नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि ऐसे मामलों में कानून की व्याख्या केवल बोले गए शब्दों के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पीछे की मंशा और परिस्थितियों के आधार पर की जाएगी।

⚖️ मामला क्या था?

यह मामला नागपुर जिले के खापा गांव का है, जहां एक 17 वर्षीय छात्रा स्कूल से लौट रही थी। रास्ते में एक युवक ने उसका रास्ता रोका, उसका नाम पूछा और "आई लव यू" कहा। लड़की ने इस घटना की शिकायत की, जिसके आधार पर युवक के खिलाफ पोक्सो एक्ट और IPC की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।

📜 निचली अदालत का फैसला

2017 में नागपुर की सत्र अदालत ने आरोपी को IPC की धारा 354A (यौन उत्पीड़न), 354D (पीछा करना) और पोक्सो एक्ट की धारा 8 (गैर-यौन संसर्ग वाला हमला) के तहत दोषी ठहराया और उसे 3 साल की जेल और ₹5,000 जुर्माने की सजा सुनाई।

🏛️ हाई कोर्ट का स्पष्ट रुख

हाल ही में जस्टिस उर्मिला जोशी‑फालके की एकल पीठ ने आरोपी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया:

❝ "आई लव यू" कहना एक भावनात्मक अभिव्यक्ति हो सकती है, लेकिन जब तक यह अश्लील मंशा, अनुचित स्पर्श, या बार-बार पीछा करने जैसे किसी व्यवहार से जुड़ा न हो, तब तक इसे यौन अपराध नहीं माना जा सकता। ❞

🔍 कोर्ट ने क्या कहा?

  • आरोपी ने सिर्फ एक बार लड़की का रास्ता रोका और कोई शारीरिक उत्पीड़न नहीं किया।

  • “आई लव यू” बोलने मात्र से यह साबित नहीं होता कि आरोपी की मंशा यौन उत्पीड़न की थी।

  • यौन अपराध साबित करने के लिए आरोपी की "यौन मंशा" (sexual intent) और परिस्थितियों का विश्लेषण जरूरी है।

  • पोक्सो जैसे गंभीर कानूनों का दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

📌 फैसले का महत्व

यह फैसला बेहद अहम इसलिए है क्योंकि यह एक मिसाल बनाता है कि कानून भावनात्मक अभिव्यक्तियों और आपराधिक मंशा के बीच फर्क करता है। कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया कि सिर्फ "आई लव यू" कहने मात्र से किसी की ज़िंदगी को अपराधी का टैग नहीं दिया जा सकता, जब तक कोई आपत्तिजनक व्यवहार या यौन आशय साफ न हो।

🗣️ सारांश में समझें

  • केवल "आई लव यू" कहना यौन उत्पीड़न नहीं।

  • कानून मंशा और परिस्थिति के आधार पर काम करता है।

  • पोक्सो एक्ट का उपयोग बेहद संवेदनशीलता से किया जाना चाहिए।


👉 यह फैसला बताता है कि कानून संवेदनशील भी है और न्यायसंगत भी।

अगर हम अपने बच्चों को कानून, अधिकार और व्यवहार की सही समझ देंगे, तो हम उन्हें भी सुरक्षित और न्यायप्रिय समाज के निर्माण में सहभागी बना सकेंगे।


✍️ रिपोर्ट

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