उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में अपराधी तत्वों और फर्जी योग्यता वाले : फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं पर एफआईआर के निर्देश, आपराधिक मामलों में घिरे वकीलों पर भी सख्ती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Ashwani Kumar Sinha
Tue, Jul 21, 2026
फर्जी डिग्रीधारी अधिवक्ताओं पर एफआईआर के निर्देश, आपराधिक मामलों में घिरे वकीलों पर भी सख्ती: इलाहाबाद हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में वकालत के पेशे में कथित अपराधी तत्वों, गैंगस्टरों, माफिया और फर्जी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर अधिवक्ता बने व्यक्तियों की बढ़ती मौजूदगी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए व्यापक निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने कहा कि यदि इस प्रवृत्ति पर समय रहते प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया, तो न्याय व्यवस्था की विश्वसनीयता और जनता का विश्वास गंभीर रूप से प्रभावित होगा।
न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने अधिवक्ता मोहम्मद कफील की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के आपराधिक रिकॉर्ड, फर्जी डिग्रियों तथा बार काउंसिल की अनुशासनात्मक व्यवस्था की समीक्षा की। न्यायालय ने कहा कि अधिवक्ता केवल अपने मुवक्किल के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि न्याय वितरण प्रणाली के अभिन्न अंग हैं। इसलिए उनके आचरण और पेशे की शुचिता बनाए रखना बार काउंसिल और न्यायपालिका दोनों की साझा जिम्मेदारी है।
न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में 5,14,439 सक्रिय अधिवक्ता पंजीकृत हैं। इनमें 4,157 अधिवक्ताओं के विरुद्ध 5,056 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 418 अधिवक्ताओं पर तीन या उससे अधिक आपराधिक मुकदमे लंबित हैं तथा कुछ अधिवक्ताओं पर 40 से अधिक मामले दर्ज होने की जानकारी भी न्यायालय के संज्ञान में आई।
हाईकोर्ट ने फर्जी डिग्री के आधार पर नामांकन कराने वाले 105 अधिवक्ताओं के विरुद्ध धोखाधड़ी, जालसाजी, प्रतिरूपण तथा अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को दिए हैं। साथ ही, जिन अधिवक्ताओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों में आरोपपत्र दाखिल हो चुके हैं, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा आवश्यकतानुसार उनके न्यायालय में पेश होने पर रोक लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि बार काउंसिल की वर्तमान अनुशासनात्मक व्यवस्था अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं है। बड़ी संख्या में गंभीर आपराधिक मामलों में नाम आने के बावजूद संबंधित अधिवक्ताओं के विरुद्ध कार्रवाई अत्यंत सीमित रही है। न्यायालय ने कहा कि उत्तर प्रदेश की न्याय व्यवस्था में अपराधी तत्वों और फर्जी योग्यता वाले व्यक्तियों की घुसपैठ न्याय प्रणाली की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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