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भोपाल। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, भोपाल द्वारा प्राप्त शिकायतों तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुपालन की जांच

56 भोग की शिकायत पर एक घंटे में पहुंची टीम प्रतिष्ठान से बेसन बर्फी, केक, पापड़ और क्रीम रोल के नमूने भी जांच के लिए

कोरबा, 28 सितंबर 2026। बलगी नगर स्थित शिव काली मंदिर में स्वर्गीय गिरवर सिंह बिसेन की पुण्य स्मृति एवं स्वर्गीय हनुमान

भोपाल। शासकीय गीतांजलि कन्या स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में

भोपाल। आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्यप्रदेश के निर्देश पर गठित संभागीय उड़न दस्ते ने

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: सुप्रीम कोर्ट ने NCPCR से क्यों कही ये बात, अपने एजेंडे में हमे मत घसीटे....

Admin

Wed, Sep 25, 2024
अपने एजेंडे मे हमे मत घसीटे ... सुप्रीम कोर्ट ने NCPCR से क्यों कही ये बात, समझ लीजिए पूरा मामला Jharkhand Shelter Home Case News : सुप्रीम कोर्ट ने एनसीपीसीआर की याचिका को खारिज कर दिया जिसमें झारखंड के आश्रय गृहों में बच्चों की बिक्री के मामलों की एसआईटी जांच की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा कि मांगी गई राहत अस्पष्ट है और एनसीपीसीआर को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) से कहा कि वह मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी के झारखंड आश्रय गृहों द्वारा कथित तौर पर बेचे गए बच्चों के मामलों की एसआईटी जांच के अनुरोध वाली याचिका को लेकर शीर्ष अदालत को अपने एजेंडे में न घसीटे। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस नोंगमईकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की आलोचना करते हुए आयोग द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि मांगी गई राहत अस्पष्ट है और इस पर विचार नहीं किया जा सकता।याचिका में किस तरह की राहत की मांग? पीठ ने एनसीपीसीआर की ओर से पेश वकील से कहा, सुप्रीम कोर्ट को अपने एजेंडे में मत घसीटिए। आपकी याचिका में किस तरह की राहत मांगी गई है? हम इस तरह के निर्देश कैसे दे सकते हैं? याचिका को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया है। शुरुआत में, एनसीपीसीआर की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि याचिका बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए झारखंड में ऐसे सभी संगठनों की शीर्ष अदालत की निगरानी में समयबद्ध जांच के निर्देश के अनुरोध के बारे में है।याचिका पर विचार करने से इनकार शीर्ष अदालत ने कहा कि एनसीपीसीआर को बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीसीआर) अधिनियम, 2005 के तहत कानून के अनुसार जांच करने और कार्रवाई करने का अधिकार है। पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। एनसीपीसीआर ने 2020 में दायर अपनी याचिका में संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत गारंटीकृत मानव तस्करी के निषेध के मौलिक अधिकारों को लागू करने का अनुरोध किया था। उसने कहा था कि विभिन्न राज्यों के बाल गृहों में विसंगतियां पाई गई हैं और इसने उन्हें अपनी याचिका में पक्षकार के रूप में जोड़ा है।बाल अधिकारों के उल्लंघन का हवाला याचिका में झारखंड में बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों का हवाला दिया गया था और कहा गया था कि राज्य के अधिकारियों ने नाबालिगों की सुरक्षा के लिए उदासीन दृष्टिकोण अपनाया है। याचिका में कहा गया याचिकाकर्ता (NCPCR) द्वारा जांच के दौरान पीड़ितों ने चौंकाने वाले खुलासे किए, जिसमें यह तथ्य भी शामिल था कि बच्चों को बाल गृहों में बेचा जा रहा था। इन तथ्यों को राज्य सरकार (झारखंड) के संज्ञान में जोरदार तरीके से लाया गया था, लेकिन जांच को विफल करने और पटरी से उतारने के लगातार प्रयास किए गए।"

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