: कर्म छिपाए न छिपे
Admin
Fri, Jul 26, 2024
" कर्म छिपाए न छिपे "
यदि व्यक्ति छिपकर , अकेले में बुरे कर्म करता है और सोचता है कि उसे कोई नही देख रहा , तो यह उसका भ्रम है । उन कर्मों की रिकार्डिंग संस्कार रूप में उसकी आत्मा में स्वतः होती जाती है । इस प्रकार वह स्वयं कर्ता और स्वयं ही अपनी करनी का गवाह बन जाता है । ये संस्कार ही उसके आगे के जीवन में उसकी उन्नति वा अवनति , लाभ वा हानि , प्रेम वा नफरत आदि को आकर्षित करते है । भगवान से भी कोई कुछ छिपा नही सकता । कर्मों के दो निरीक्षक सदा हमारे साथ है -- एक मन स्वयं और दूसरा परमात्मा , इसलिए कभी भी बुरा कर्म ना करें ।
विज्ञापन