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: आर्य समाज मंदिर में विवाह के गवाह वास्तविक और प्रामाणिक होने चाहिए: *दिल्ली हाईकोर्ट*

Admin

Wed, Aug 28, 2024
*✍️😊* आर्य समाज मंदिर में विवाह के गवाह वास्तविक और प्रामाणिक होने चाहिए: *दिल्ली हाईकोर्ट* दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला और उसके सगे चाचा के बीच आर्य समाज मंदिर में संपन्न विवाह को अमान्य घोषित किया, क्योंकि उस व्यक्ति ने झूठा हलफनामा देकर कहा था कि जब उसकी पत्नी और बेटा था तब वह अविवाहित था। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंडपीठ ने विवाह की तस्वीरें देखीं और पाया कि जोड़े के अलावा पुजारी को छोड़कर कोई भी समारोह में मौजूद नहीं था। महिला के पिता द्वारा दायर हेबियस कॉर्पस याचिका पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा, "ऐसी शादियों की वैधता और पवित्रता पूरी तरह से संदिग्ध है।" अदालत ने आर्य समाज मंदिर को निर्देश दिया कि वह अब से यह सुनिश्चित करे कि जब किसी भी विवाह के लिए गवाह पेश किए जाएं तो वे वास्तविक और प्रामाणिक गवाह हों, जिनकी स्थिति को ठीक से सत्यापित किया जा सके। अदालत ने कहा, "मंदिर को दोनों पक्षों यानी दूल्हा और दुल्हन की ओर से कम से कम एक गवाह बुलाने का प्रयास करना चाहिए, जो रिश्तेदार हो। अगर कोई रिश्तेदार नहीं है तो किसी ऐसे परिचित को गवाह बनने की अनुमति दी जाएगी, जो संबंधित पक्षों को उचित अवधि से जानता हो।" अदालत ने आदेश दिया, "इस आदेश की कॉपी आवश्यक जानकारी के लिए और इस संबंध में उचित कदम उठाने के लिए मुख्य सचिव, जीएनसीटीडी को भेजी जाए।" पिता ने आरोप लगाया कि महिला का फूफा और चाचा उसे अपनी बेटी से मिलने से रोक रहा था। पिता के साथ-साथ महिला की बुआ, चाचा की पत्नी ने भी शिकायत दर्ज कराई। खंडपीठ ने कहा कि विवाह प्रमाणपत्र से पता चलता है कि व्यक्ति ने खुद को अविवाहित घोषित किया था। न्यायालय ने कहा कि जिस तरह से व्यक्ति ने महिला से विवाह करने के लिए आर्य समाज मंदिर द्वारा जारी विवाह प्रमाण पत्र में खुद को अविवाहित बताया वह स्पष्ट रूप से कानून के विरुद्ध है। न्यायालय ने कहा, "विवाह स्वयं झूठे हलफनामों के आधार पर संपन्न हुआ है, इसलिए कानून की नजर में इसका कोई महत्व नहीं है।" न्यायालय ने विवाह को अमान्य करार देते हुए स्पष्ट किया कि विवादों में व्यक्ति की पहली पत्नी कानून के अनुसार अपने उपचार का लाभ उठा सकती है। व्यक्ति ने न्यायालय को बताया कि वह अपनी पहली पत्नी से तलाक लेना चाहता है, इसलिए पीठ ने कहा कि उसे कानून के अनुसार अपने उपचार का लाभ उठाना होगा। न्यायालय ने कहा कि व्यक्ति के खिलाफ पहली पत्नी की शिकायत पर आगे बढ़ा जा सकता है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। *केस टाइटल- मुकेश कुमार सेन बनाम राज्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली एवं अन्य।*

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