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: हम अपने जीवन के 20 से 40 वर्षों  के दौरान जिन  बातो बातों को महत्व देते हैं, उन्हे  ही जीवन के अन्त तक आते आते बहुत कम महत्व देने लगते हैं ।

Admin

Wed, Jul 10, 2024
मानसिक बल -किस्मत हम अपने जीवन के 20 से 40 वर्षों  के दौरान जिन  बातो बातों को महत्व देते हैं, उन्हे  ही जीवन के अन्त तक आते आते बहुत कम महत्व देने लगते हैं । -हम में से तक़रीबन लोग जिन बातो को सब से कम महत्व दे रहे हैं उन में गहन मानवीय सम्बन्धों, दयालुतापूर्ण  कार्य, अच्छी शारीरिक अवस्था, कार्य की गुणवत्ता  है । -हम अपने जीवन का अधिकतर भाग  नाम और शोहरत पाने में लग़ा देते हैं । -हम ऐसा इसलिये करते हैं क्योंकि आसपास के लोगो ने सिखाया है कि  हमारे लिये यही सब  से अधिक महत्व रखता है । -अक्सर लोगो के दिमाग में जो बातचीत चलती रहती है वह उन्हे यही कहती रहती है कि  कोई काम उन्हे क्यों नही करना चाहिये और साथ ही असफलता से जुड़े परिणाम भी  गिनते  रहते हैं । प्रायः मस्तिष्क हमें नीचा  दिखाता  रहता  है । - इस सूक्ष्म विघ्न से बचने के लिये अपने दिल और भावना  को मजबूत करो   । वे हमें आगे बढ़ने और महानता तक जाने में सहायक होते हैं । वे उत्साह वा जनून  रचते हैं और हमारे भीतर के उस महान अस्तित्व को बाहर ला  कर अपना  प्रदर्शन करने का निमंत्रण देते हैं । -भले ही तुम कितना  भी   अमहत्वपूर्ण  कार्य क्यों न कर रहे हो, उसे  दिल से करें जैसे आप अपने महत्वपूर्ण कार्य करते हैं । जब हम हर टाइम अपने प्रत्येक  कार्य में श्रेष्टठता  के प्रति समर्पित रहते हैं तो हम  अपने लिये  सकारात्मक किस्मत का निर्माण कर रहे होते हैं । इस से आत्म सम्मान  में वृध्दि होती है तथ उर्जा वा जनून उत्पन्न होता है । आप अपने लिये बेहतर वा अच्छा  महसूस करने लगते हो । -जो लोग अपने बारे  में अच्छा  महसूस करते हैं, वे बहुत अच्छे  काम कर पाते हैं और उन्हे अपने श्रेष्टठता  के स्तरों को बढ़ाने  में देर नही लगती । यह एक ऊपर की  ओर ले जाने वाला वर्तूल  है जो आपको आनंद, सार्थकता और आन्तरिक शांति तक ले जाता  है । यही आपका की किस्मत का  निर्माण है । -परमपिता परमात्मा  आप की जीत चाहता  है । तुम्हे केवल यही करना है कि  अपने तरीके छोड़ कर, उन नियमों को जानो जिन के अनुसार प्रक्रति और  परमात्मा कार्य करते हैं और  हमें उसी अनुसार  सोचना  व कार्य करना है । इन नियमों को सीखने के लिये समय लगेगा । तुम्हे एकांत में मनन करना होगा । तुम्हारे अन्दर एक दार्शनिक बनने की सच्ची इच्छा होनी चाहिये ।

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