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: कामयाबी की  सीमायें केवल हमारे  चिंतन में निवास करती है ।

Admin

Mon, Jul 1, 2024
-मानसिक  बल - नेतृत्व -कामयाबी की  सीमायें केवल हमारे  चिंतन में निवास करती है । - हर खोज, हर उपलब्धि अथवा आविष्कार की शुरुआत किसी पुरुष या महिला के दिमाग में समान्य से विचार  से होती है । -दिमाग को इस तरह प्रशिक्षित करो कि   अभी हो  रहे सारे उथल पुथल एक  सीखने, विकसित होने  व सफल होने का एक मौका है । -यदि तुम हर सुबह दुखी और निराशा  भाव  से बिस्तर छोड़ते हो  तो  तुम एक प्रेरणादायक नेतृत्व नही कर सकते । -यदि तुम दिन भर  लोगो पर चीखते चिलाते हो तो उनके मन पर  राज  नही कर  सकते । उनका दिमाग ऊर्जावान  नही बना सकेंगे । -किसी दूसरे को पसंद करने से पहले खुद को पसंद करो । बाहर की सफलता अन्दर से आरम्भ होती है । -संगठन में सुधार लाना चाहते  हैं तो पहले स्वयं का सुधार  करें  यदि   आप महान विचारो का चिंतन  नही करते  तो महान चीजे कर पाना असम्भव है । -श्रेष्ट नेता स्वयं को हर रोज़ नया बनाता है अर्थात जीवन में नये विचार  भरता  है नया पढ़ता  है । -सप्ताह में एक दिन अपना नवीनीकरण करो । आराम करो ।  ज्ञान से भरपूर करो । अपने मन को शांत करो । जब आप का मन शांत होगा उस समय बहुत अच्छे  अच्छे विचार  आते हैं । जब प्रकृति शांत होती  है उस समय बहुत बल मिलता है । सुबह 2 बजे सभी महान आत्माएं उठती थे ।  आप अगर 2 बजे नही जाग सकते तो  जब भी  उठते हैं,  उठते ही एक घंटा   ज्ञान - योग में लगाओ । -अगर आप को पेड़ काटने की ड्यूटी दी जाये और इसे काटने में आठ घंटे लगते हैं तो आप छह  घंटे कुल्हाडी  तेज करने में लगाओ । विश्व को बदलना  चाहते हैं तो ज्यादा समय अपने दिमाग पर खर्चों  । -बाहरी स्वरूप और आन्तरिक स्वरूप  में जितना अंतर होगा हमारा जीवन उतना ही कम तरीके से कारगर होगा । अंतराल जितना अधिक होगा, ब्रह्माण्ड ( परमात्मा  ) हमें  समर्थन कम देगा, क्योंकि हम उन नियमों के अनुसार नही चल रहे हैं जिनके अनुसार हमें चलना  चाहिये  । -बाहरी और आन्तरिक स्वरूप में अंतर जितना अधिक होता  है तो आनंद   व मानसिक ऊर्जा  कम हो जाती है और हम बहुत छोटा  जीवन जीने लगते हैं, हम लोगो की वाह वाह पाने में लग जाते हैं और चापलूस लोगो से घिर जाते हैं । जो कोई अच्छी राय दे वह दुश्मन लगने  लगेगा

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