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: लंबे समय तक विचाराधीन रहने के बाद आरोपी को निर्दोष बरी किए जाने से मुआवजे के लिए दावा करने की संभावना बढ़ सकती है: सुप्रीम कोर्ट*

Admin

Mon, Sep 30, 2024
✍️😊 --------------------------- *लंबे समय तक विचाराधीन रहने के बाद आरोपी को निर्दोष बरी किए जाने से मुआवजे के लिए दावा करने की संभावना बढ़ सकती है: सुप्रीम कोर्ट* *केस टाइटल- वी. सेंथिल बालाजी बनाम उप निदेशक* एक ऐसे मामले में जहां आरोपी ने विचाराधीन कैदी के रूप में लंबे समय तक हिरासत में रहने के बाद निर्दोष बरी किया, मुआवजे के लिए दावा करने की संभावना बढ़ सकती है, यह बात सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में वी सेंथिल बालाजी को जमानत देने के फैसले में कही। कोर्ट ने कहा कि किसी दिन संवैधानिक न्यायालयों को इस "अजीबोगरीब स्थिति" का समाधान करना होगा। निर्दोष बरी किए जाने के मामले में वे मामले शामिल नहीं हैं, जहां गवाह मुकर गए या जांच में खामियां पाई गईं। जस्टिस अभय एस ओके और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा: "किसी दिन, न्यायालयों, विशेषकर संवैधानिक न्यायालयों को हमारी न्याय वितरण प्रणाली में उत्पन्न होने वाली अजीबोगरीब स्थिति पर निर्णय लेना होगा। ऐसे मामले हैं, जिनमें विचाराधीन कैदी के रूप में बहुत लंबे समय तक कारावास में रहने के बाद आपराधिक न्यायालयों द्वारा अभियुक्त को निर्दोष बरी कर दिया जाता है। जब हम निर्दोष बरी कहते हैं तो हम उन मामलों को छोड़ देते हैं, जिनमें गवाह मुकर गए हों या वास्तविक रूप से दोषपूर्ण जांच हुई हो। निर्दोष बरी होने के ऐसे मामलों में अभियुक्त के जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष बर्बाद हो जाते हैं। किसी दिए गए मामले में यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अभियुक्त के अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है, जिससे मुआवजे के लिए दावा किया जा सकता है।" पीठ ने ये टिप्पणियां अपनी चर्चा के संदर्भ में कीं कि विचाराधीन कैदी के रूप में लंबे समय तक कारावास को धन शोधन निवारण अधिनियम जैसे विशेष कानूनों के तहत मामलों में भी जमानत देने के आधार के रूप में माना जाना चाहिए।

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