: जनहित याचिका
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Thu, May 16, 2024
जनहित याचिका क्या है ?
जनहित याचिका वह याचिका है जो कि लोगों सामूहिक हितों के लिए न्यायालय में दायर की जाती है। कोई भी व्यक्ति जनहित में या फिर सार्वजनिक महत्व के किसी मामले के विरुद्ध जिसमें किसी वर्ग या समुदाय के हित अथवा उसके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हों, जनहित याचिका के जरिए न्यायालय की शरण ले सकता हैं।
जनहित याचिका किस न्यायालय में दायर की जा सकती हैं
1, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के समक्ष ।
2 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय के समक्ष ।
जनहित याचिका कब दायर की जा सकती है ?
जनहित याचिका दायर करने के लिए यह जरूरी है कि लोगों के सामूहिक हितों जैसे सरकार के कोई फैसले या योजना जिसका बुरा असर लोगो पर पड़ा हो। किसी एक व्यक्ति के मौलिक अधिकार का हनन होने पर भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है।
जनहित याचिका कौन व्यक्ति दायर कर सकता हैं ?
कोई भी व्यक्ति जो सामाजिक हितों के बारे में सोच रखता हो, वह जनहित याचिका दायर कर सकता हैं। इसके लिए यह जरूरी नहीं कि उसका व्यक्तिगत हित भी सम्मिलित हो ।
जनहित याचिका किसके विरुद्ध दायर की जा सकती है ?
जनहित याचिका केंद्र सरकार राज्य सरकार नगर पालिका परिषद और किसी भी सरकारी विभाग के विरुद्ध दायर कीजा सकती यह याचिका किसी निजी पक्ष क विरुद्ध दायर नहीं की जा सकती। लेकिन अगर किसी निजी पक्ष या कंपनी के कारण जनहितों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उदाहरण के लिए बिलासपुर में स्थित किसी निजी कारखाने से वातावरण प्रदूषित हो रहा है , तब जनहित याचिका में निम्नलिखित प्रतिवादी होंगे १ छत्तीसगढ राज्य २ राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ३ निजी कारखाना
जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है ?
जनहित याचिका ठीक उसी प्रकार दायर की जाती है, जिस प्रकार से रिट (आदेश) याचिका दायर की जाती है।
उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया है ?
प्रत्येक याचिका की एक छायाप्रति होती है। यह छाया प्रति अधिवक्ता के लिए बनायी गई छायाप्रति या अधिवक्ता की छायाप्रति होती है। एक छायाप्रति प्रतिवादी को देनी होती है, और उस छायाप्रति की देय रसीद लेनी होती है। दुसरे चरण में जनहित याचिका की दो छायाप्रति, प्रतिवादी द्वारा प्राप्त की गई देय रसीद के साथ न्यायालय में होती है।
उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने की प्रक्रिया क्या है ?
उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिए याचिका की पांच छाया प्रति दाखिल करनी होती है । प्रतिवादी को याचिका की छाया प्रति सूचना आदेेश के पारित होने के बाद से ही की जाती है ।
क्या साधारण पत्र के जरिए भी जनहित याचिका दायर की जा सकती हैं ?
१ व्यक्ति द्वारा, सामाजिक हित का भावना रखने वाले व्यक्ति द्वारा। २ उन लोगों के अधिकार के लिए जो कि गरीबी या किसी और कारण से न्यायालय के समक्ष न्याय पाने के लिए नहीं आ सकते ।
जनहित याचिका दायर होने के बाद का प्रारूप क्या होता है ?
१, सुनवाई के दौरान दिए गए आदेश, इनमें किसी औद्योगिक संस्था को बंद करने के आदेश, कैदी को जमानत पर छोड़ने के आदेश आदि होते हैं । २, अंतिम आदि जिसमें सुनवाई के दौरान दिए गए आदेशों एवं निर्देशों को लागू करने व समय सीमा जिसके अंदर लागू करना होता है ।
क्या जनहित याचिका के लिए वकील जरुरी है और राष्ट्रीय, राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अंतर्गत सरकार के द्वारा वकील की सेवाए प्राप्त कराए जाने का भी प्रावधान है ।
निम्न परिस्थितियों में भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है । * जब गरीबों का न्यूनतम मानव अधिकारों का हनन हो रहा हो। * जब कोई सरकारी अधिकारी अपने कर्तव्य एवं दायित्वों की पूर्ति न कर रहा हो । * जब धार्मिक अथवा संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का हनन हो रहा हो। * जब सड़क में रोशनी/लाईट की व्यवस्था न हो, जिससे आने जाने वाले व्यक्तियों को तकलीफ हो । * जब कहीं रात में ऊंची आवाज में गाने बजाने के कारण ध्वनि प्रदूषण हो । * जहां निर्माण करने वाली कंपनी पेड़ों को काट रही हो और वातावरण प्रदूषित कर रही हो । * जब राज्य सरकार की अधिक कर लगाने की योजना से गरीब लोगों के जीवन पर बुरा प्रभाव पड़े । * जेल अधिकारियों के खिलाफ जेल सुधार के लिए। * बाल श्रम एवं बंधुआ मजदूरी के खिलाफ । * लैंगिक शोषण में महिलाओं के बचाव के लिए । * सड़क एवं नालियों के रख रखाव के लिए । * सांप्रदायिक एकता बनाए रखने के लिए । * व्यस्त सड़कों से विज्ञापन के बोर्ड हटाने के लिए, ताकि यातायात मे कठिनाई न हो ।जनहित याचिका से संबंधित उच्चतम न्यायालय के कुछ महत्त्वपूर्ण निर्णय।
* रूरल लिटिगेशन एंड इंटाइटलमेंट केन्द्र बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और रामशरण बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा की जनहित याचिकाओ की सुनवाई के दौरान न्यायालय को प्रक्रिया से संबंधित औपचारिकताओ में नहीं पड़ना चाहिए। * शीला बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिका को एक बार दायर करने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता।विज्ञापन