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: गलत सोनोग्राफी रिपोर्ट पर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग का फैसला

Admin

Sat, Jan 20, 2024
गर्भवती महिला की अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट रिपोर्ट में चूक को लेकर राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने डॉक्टर और अस्पताल पर 7: 50 = 7: 50 लाख यानी कुल 15 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। यह राशि पीड़ित महिला को मुआवजा के तौर पर दी जाएगी। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग के ए पी शाही की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अल्ट्रासोनोग्राफी इसलिए कराई जाती है, गर्भ  में पल रहे शिशु की शारीरिक विकास  में विकार संबंधी जानकारी मिल सके, मगर डॉक्टर व संबंधित अस्पताल की रिपोर्ट में बच्चों की रिपोर्ट नॉर्मल बताया गया था ,जबकि ऐसा नहीं था , संभवत टेस्ट करते समय घोर लापरवाही  बरती गई थी, क्यू की बच्चे का पूर्ण शरीर नहीं  था , जिसकी वजह से बच्चा अपंग पैदा हुआ उसके घुटने के नीचे से दोनों पैर नहीं थे, और एक हाथ कोहनी के नीचे से गायब था , यह बच्चा जीवन भर स्पेशल नर्स केयर में रहेगा , इसकी वजह से इसके माता-पिता को भी जीवन भर मानसिक प्रताड़ना सहने को मजबूर होना पड़ेगा । इस घोर लापरवाही को नकारा नहीं जा सकता। राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने मामले में राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा डॉक्टर और अस्पताल पर लगाए गए 75=75000 के जुर्माने को ना काफी बताया । यह था पूरा मामला, केरल के त्रिशूर की मंजू ने मदर अस्पताल में 2005 में अपने गर्भस्थ शिशु की जांच के लिए अल्ट्रासोनोग्राफी टेस्ट कराया था। इसकी रिपोर्ट में बच्चे का विकास नॉर्मल बताया गया था , उसने दो बार इसी अस्पताल से टेस्ट कराया, दोनों में ही गर्भस्थ शिशु को नॉर्मल बताया गया , जबकि महिला की डिलीवरी हुई तो उसे अपंग बच्चा पैदा हुआ ।

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