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भोपाल। शासकीय गीतांजलि कन्या स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल में

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: यादें दुखदाई एवं दुःख न देने वाली दोनों हो सकती हैं !

Admin

Tue, Jul 2, 2024

यादें दुखदाई एवं दुःख न देने वाली दोनों हो सकती हैं !

यादें भी अंतर्मन से आने वाले विचारों का प्रमुख कारण हैं ! इससे कई बार पीड़ाजनक, खिन्नता एवं गुस्से की स्थितियां बनी रहती हैं ! पुराने अनुभव यादों के रूप में अंतर्मन में उठते रहते हैं ! जब उनसे जुड़े शब्द, लोग, परिस्थितियां या दृश्य किसी भी रूप में सामने आ जाएं ! अगर हटा देने का अभ्यास न हो तो आप आपे से बाहर हो जाते हैं, बहक जाते हैं ! लोग यादों से ही खुशी, दुःख या गुस्से से भर जातें हैं, खिन्न हो जाते हैं ! उनको हटाने या उनमें और बहने के लिए शराब पीते हैं ! शराब पी कर पुरानी यादों से प्रभावित होकर आपे से बाहर आकर लोग क्या-क्या नहीं करते ! जीना दूभर हो जाता है ! खुद का भी और साथ वाले लोगों का भी ! यह यादें और कुछ नहीं, असल में दूसरा सोच रहा है या आप सोच रहे हैं और एक दूसरे को डिस्टर्ब कर रहे हैं ! आप अपने मन में सोचो मैं शांत हूं आप भी शांत हैं ! दोनों तरफ से यादें बंद हो जाएंगी और आप को साधना में सकूंन मिलेगा ! देखे एवं सुने हुए विषयों के प्रति ललायित न होने से एक नियंत्रित अवधारणा अथवा समझ विकसित होती है ! कोई चित्र देखा अथवा सुना और उसे पाने की तीव्र ललक पैदा हो गई ! जब तक मिली नहीं थी तो अपनी उस बैचैनी को याद करें ! जब मिल गई तो आप उसे कितना सहेज के रखते हैं ! जरा-सी खरोंच नहीं पड़ी तो मन अप्रसन्न और अशांत हो जाता है ! लोग कहते हैं ये खंडित मन की अवस्थाएं हैं ! एकाग्र मन की नहीं ! वास्तव में जिन वस्तुओ को मन में चाहने लगते हैं तो उन वस्तुओ की तरंगे हमें विचलित करने लगती हैं ! उन वस्तुओं की बजाये किसी फूल या पीपल के पेड़ को देखा करें ! आप को इन की ऊर्जा विचलित नही करेगी !

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