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: देखते हैं लोअर टू लोअर

Admin

Fri, Sep 22, 2023

कोई व्यक्ति जीवन में हल्का विचार करती है और पूरे जीवन भर हल्का ही विचार करती रहती है। एक व्यक्ति अपने नसीब को दोष देते रास्ते से जा रहा था। मेरे नसीब में कोई भी अच्छी बात नहीं है। "मेरे नसीब में पत्थर ही पत्थर है।" ऐसा वो बोलता था। उसी समय शंकर पार्वती ऊपर से जा रहे थे। तब पार्वती को उस व्यक्ति पर बड़ी दया आई। उसने शंकर को कहा आप उस व्यक्ति को कुछ मदद करो। तब शंकर ने पार्वती को समझाया "मैंने उसे बहुत मदद की मगर उसका कोई फायदा नहीं हुआ, वो केवल अपने नसीब को दोष देता रहता है। अभी मदद करके भी इसका कोई उपयोग नहीं होगा । मगर पार्वती को उस व्यक्ति पर कुछ ज्यादा ही दया आई। इसलिए उसे शंकर को फिर से कहा कि आप मेरे कहने पर एक बार उसे मदद करो जब पार्वती की इच्छा अनुसार शंकर उस व्यक्ति को मदद करने का तैयार हुए । उसके अनुसार वो व्यक्ति जिस रास्ते से जा रहा था उस रास्ते पर उसके सामने एक सोने का घड़ा रख दिया। वह व्यक्ति सामने से आया। वह सोने के घड़े से टकराया। फिर भी उसने नीचे देखने का कष्ट नहीं किया। "मेरे नसीब में भी पत्थर और रास्ते में भी पत्थर"! ऐसे कह कर वह आगे निकल गया । लेकिन सोने के सोने का घड़ा उसने देखा भी नहीं । यानी इसका विचार पहले हल्का था और आगे भी हल्का ही रह गया ।

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