: मानसिक शक्ति का विकास जानें कैसे
Admin
Wed, Jun 19, 2024
-मानसिक शक्ति -विकास
-किसी भी मुकाम पर, कितने भी बड़े पद पर आप पहुँच जाये, फ़िर भी सीखना न छोड़े ।
-जैसे विचार होते हैं वैसे ही बोल होते हैं, जैसे बोल होते हैं वैसे ही व्यवहार और कर्म होता है ।
-अगर संकल्प नकारात्मक है तो बोल और कर्म भी नकारात्मक होगा ।
-संकल्प शुध्द और सकरात्मक है तो बोल और कर्म भी शुध्द और सकरात्मक होगा ।
-अगर संकल्प चोरी के हैं, चरित्र हीनता, सामाज विरोधी, कानून विरोधी के हैं तो यह रास्ता जेल में खुलेगा ।
-अगर मन में ईर्ष्या, दबंगई, पीठ पीछे निंदा, सभी पर हकूमत, दूसरों को दबाने, काम करना नही सिर्फ श्रेय लेने का है, किसी को आगे न आने देने के हो तो यह रास्ता मानसिक अशांति , पारिवारिक अशांति, संस्था में अशांति, देश में अशांती ही लायेगा चाहे आप भौतिक रुप से सम्पन्न दिखेंगे । आप अपने आसपास चापलूस लोगो से घिर जायेगें । आप की समझ काम नही करेगी । आप को अच्छे लोग दुश्मन दिखेंगे ।
-हमारी जो भावना होती है उस अनुसार फल मिलता है । इसलिये अपनी भावना को श्रेष्ट बनाओ ।
-आप से चाहे छोटे हैं चाहे बड़े हैं दोनो की तरफ़ कल्याण की भावना रखो । बड़े भी गलतियां करते है, उनके भी आसुरी संस्कार हैं । चाहे कितना महान हो उसे भी कल्याण भावना की जरूरत होती है क्योंकि वह दूसरों का कल्याण करते करते खुद अन्दर से खाली हो जाते हैं, उन्हें लोग मन से प्यार नही करते, मजबूरी से प्यार और ऊपर ऊपर का प्यार करते हैं ।
-छोटे छोटे कदमो से आप अपना रास्ता विकास की ओर खोल सकते हैं ।
-किसी को मिलने का समय दिया है तो उसकी पालना करें ।
-कोई निर्णय लिया है तो उसे पूरा करें ।
-किस भावना से हां या ना से साथ दे रहे हैं । अपनी भावना शुध्द हो, धोखा देने की ना हो, नुकसान करने की ना हो, चाहे वह विरोधी भी हो ।
-याद रखो विचार के पीछे भावना क्या है उस अनुसार मन में शांति या अशांती महसूस होगी ।
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