: विचारों को शुद्ध बनाने के लिये भी बुक्स पढ़ते रहें
Admin
Mon, Jul 8, 2024
भाव
जो लोग हमें सुख देते हैं उन के प्रति मैत्री भाव, दुखी लोगो के प्रति करुणादायक दया के भाव रखें ! जो लोग सार्थक और अच्छे कार्य करने वाले हैं उन के प्रति हर्ष एवं उत्साह का भाव रखो ! इस से मन में शांति, विचारों में स्पष्टता एवं ठहराव बने रहते हैं !
यादें
मनुष्य को प्रशंसा बहुत पसंद है ! जब भी किसी ने बचपन में आप की सुंदर लिखाई, आपके शरीर, नयन-नक्श या सुंदर गाने की , आपकी बातों को समझने की क्षमता, सुंदरता या कुछ भी आप की प्रशंसा की वह आप को आज तक याद है ! आज भी कितने ही काम सिर्फ इसलिए करते हैं कि कोई प्रशंसा के दो मीठे बोल बोल दे ! इस कान रस को सुनने के लिये कभी दान देंगे, कभी किसी विशेष ढंग से हाव-भाव बनाएगे ! विशेष ढंग से बोलने की कोशिश करेंगे !
कोई कुछ बोलता नहीं-प्रशंसा नहीं करता तो आपको पीड़ा होती है ! प्रशंसा का न मिलना पीड़ा देता है ! फिर आपके शब्द होते हैं- यश नहीं मिलता, किसी के लिये कुछ भी कर लो कद्र ही नही इज्जत ही नहीं, इत्यादि ! थोड़ा-सा वैचारिक ध्यान करें और स्वतंत्र हो जाएं मन की घुटन से हो सके तो हमेशा के लिए ! आप ने अच्छा किया, आप को मन में ख़ुशी होती है, यही यश है ! यही यश एक दिन आप को ऊँच पद पर पंहुचा देगा ! आप को सभी सुविधाएँ मिलेंगी ! इसलिये निष्काम हो कर अच्छे कार्य करते रहें ! भगवन को याद करते रहें ! आप के पुण्य का खाता रिकॉर्ड हो रहा है !
अच्छा दिखने के लिए आप क्या कुछ करते हैं ! शरीर को कितनी पीड़ा देते हैं ? भोजन में क्या-क्या कटौती करते हैं ? विचारों को शुद्ध बनाने के लिये भी बुक्स पढ़ते रहें, योग लगाते रहें, हर परिस्थिति में भी अच्छा सोचते रहें !
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