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हर सामान की एमआरपी पर मोलभाव करना आपका अधिकार है : क्या एमआरपी अंतिम कीमत है ? उपभोक्ता मोलभाव और छूट मांगने का अधिकार समझें

Ashwani Kumar Sinha

Mon, Jun 15, 2026

क्या एमआरपी अंतिम कीमत है ? उपभोक्ता मोलभाव और छूट मांगने का अधिकार समझें

भोपाल। अधिकांश उपभोक्ता दुकानों पर सामान खरीदते समय उत्पाद पर अंकित एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) को अंतिम और अपरिवर्तनीय मूल्य मान लेते हैं। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्राहकों को यह समझना चाहिए कि एमआरपी का अर्थ वह अधिकतम मूल्य है, जिससे अधिक कीमत नहीं ली जा सकती, लेकिन कई परिस्थितियों में विक्रेता इससे कम मूल्य पर सामान बेच सकता है। ग्राहक पंचायत से जुड़े लोगों का कहना है कि ग्राहक अक्सर सब्जी, फल या स्थानीय बाजारों में मोलभाव करते हैं, लेकिन बड़े प्रतिष्ठानों, ज्वेलरी दुकानों, स्टेशनरी दुकानों, कपड़ा दुकानों, इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में छूट या बेहतर मूल्य की मांग करने से संकोच करते हैं। उनका मानना है कि ग्राहक को उपलब्ध छूट, ऑफर या बेहतर मूल्य के बारे में पूछने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।

अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत यह भी मांग कर रहा है कि मूल्य निर्धारण प्रणाली में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। उनका कहना है कि अधिकांश उत्पादों पर अंकित एमआरपी निर्माता या ब्रांड द्वारा तय की जाती है, जबकि उपभोक्ता और शासन को यह जानकारी उपलब्ध नहीं होती कि उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और वितरण की लागत कितनी है तथा कुल मूल्य में लाभांश का अनुपात कितना है।

ग्राहक पंचायत का मानना है कि मूल्य निर्धारण में अधिक पारदर्शिता से ग्राहकों का विश्वास बढ़ेगा और बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलेगा।
। उनका कहना है कि जागरूक उपभोक्ता ही बेहतर बाजार व्यवस्था और पारदर्शी व्यापारिक वातावरण का आधार बन सकता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय कानून के अनुसार कोई भी विक्रेता एमआरपी से अधिक मूल्य नहीं वसूल सकता, लेकिन कई मामलों में एमआरपी से कम मूल्य पर बिक्री करना संभव है। हालांकि कुछ श्रेणियों के उत्पादों, सेवाओं या नियंत्रित मूल्य वाले सामानों में मूल्य निर्धारण की अलग व्यवस्थाएं भी लागू हो सकती हैं।
"हर सामान की एमआरपी पर मोलभाव करना आपका अधिकार है" ग्राहक छूट या कम कीमत मांग सकता है, लेकिन दुकानदार उसे स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं होता। विक्रेता एमआरपी से अधिक नहीं ले सकता, पर कम कीमत पर बेचना उसके विवेक पर निर्भर करता है।

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