: खुशी एवम् शान्ति के आंतरिक नियम
Admin
Sat, Mar 23, 2024
आन्तरिक बल
नियम - लक्ष्य और शांति
आयुर्वेद में सोना, चांदी, ताम्बा, अभ्रक आदि की भस्म बनाकर उनके सेवन का विधान है !
जहर का भी बड़ा लाभ बताया गया है, पर वह संभव तभी होता है जब विष को विधि पूर्वक शुद्ध किया जाए !
नेत्रों की उपयोगिता अपने लिए जानकारियां एकत्र कर देने के लिए है, पर वाणी का महत्व उससे अधिक है ! उसके माध्यम से पढ़ा और पढ़ाया जा सकता है ! जन मानस को उद्वेलित करने में वाणी का प्रयोग होता है, इसे वशीकरण शब्द कहा गया है !
मीठे वचनों की तुलना वशीकरण मन्त्र से की जाती है ! द्रोपदी के मुख से कुछ अक्षर कडवे निकले थे कि उतने भर से महाभारत खड़ा हो गया और कितनी विशाल सेना का सफाया हो गया !
जीभ को परिष्कृत करना सरस्वती की साधना कही जाती है !
आहार के संयम से आरोग्य और दीर्घ जीवन, दोनों मिलते हैं ! मौन धारण का अभ्यास समस्त तपों में उच्चकोटि का है !
एकाग्रता और एकात्मता दोनों ही साधनाएं मौन धारण से बनी हैं ! जिसने जीभ की ये दोनों साधनाएं कर ली, समझना चाहिए कि उसका इन्द्रिय सयम समग्र हो गया है !
तपस्वी (जरूरी नहीं वेश भूसा वाला ही हों) की वाणी अमोद्य होती है ! वह शब्दभेदी शब्द बोलता है !
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