: राजधानी भोपाल के तहसील(बैरागढ़) संत हिरदाराम नगर में कई नामांतरण में न नोट शीट चला न इश्तहार जारी, कलेक्टर द्वारा एसडीएम को जांच हेतु आदेश जारी
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Sat, Sep 7, 2024
राजधानी भोपाल के तहसील(बैरागढ़) संत हिरदाराम नगर में कई नामांतरण में न नोट शीट चला न इश्तहार जारी, कलेक्टर द्वारा एसडीएम को जांच हेतु आदेश जारी
एक प्लॉट ग्राम बेहटा के नामांतरण की प्रक्रिया को समझें । अधिवक्ता ने अपने क्लाइंट के नामांतरण आवेदन को विधिवत समस्त दस्तावेज के साथ तहसील संत हिरदाराम नगर बैरागढ़ में लगाया, जिसका आवेदन क्रमांक 022802021538046 APP 20825337 जिसका प्रकरण क्रमांक 0051/अ-6/24-25 इस प्रकरण को अतिरिक्त तहसीलदार राजेश गौतम के लिपिक लोकमान्य शर्मा द्वारा कहा गया कि यह भूमि पूर्व में आफताब जहां बेगम के नाम पर है। ऐसे प्रकरण में 15 से 20 हजार रुपए लेते है बगैर पैसों के नामांतरण नहीं करते हैं। मांगे गए रूपयों की डिमांड पूरी नहीं करने पर अधिवक्ता द्वारा दिनाक 23/04/2024 को लगाए गए आवेदन को 20/07/2024 को यह कहते हुए अपात्र कर दिया कि वर्तमान राजस्व में विक्रेता का नाम नहीं है और ऐसी स्थिति में प्रकरण का नामांतरण किया जाना संभव नहीं है । फिर इसी प्रकरण में ट्विस्ट ट्विस्ट देखने को मिलता है। यही लम्बित प्रकरण पुनः आवेदिका विधि विरुद्ध प्रस्तुत करती है इसमें अधिवक्ता के नाम की जगह पर स्वयं और मोबाइल नंबर 8120921942 एक (दलाल/ ब्रोकर) का अंकित कर. जिसका आवेदन दिनांक 15/7/2024 को आवेदन प्रस्तुत किया गया जिसका आवेदन क्रमांक 022802021538046 APP 21728108 आवेदन दिनाक 15/07/2024 और प्रकरण क्रमांक 0341/अ-6/24-25 इस आवेदन पर कार्यवाही कितना तेजी से, सिर्फ 7 दिनों में 22/07/2024 को नामांतरण आदेश पारित कर दिया गया। विशेष नोट, इसी दलाल /ब्रोकर के मोबाईल नम्बर 8120921942 पर रेवेन्यू केस मैनेजमेंट डिस्टेंट (RCMS) मध्य प्रदेश शासन के पोर्टल पर 253 (दो सौ तिरपन) आवेदन दर्ज है जिसमें आवेदन की समय अवधि पूर्ण होने के पहले ही नामांतरण का आदेश पारित किया गया है। जांच के बिंदु /। 1, लंबित प्रकरण का आवेदिका को पहले कैसे पता चला कि अधिवक्ता द्वारा लगा आवेदन 20 जुलाई 2024 को निरस्त होने वाला हैं ? तभी तो उसने 15 जुलाई 2024 को उसी प्लॉट का नया आवेदन ऑनलाइन जमा कर दिया ? 2 एक ही तहसील कार्यालय द्वारा एक ही प्रकरण को पहले 20 जुलाई को निरस्त कर दिया जाता हैं , और पुनः उसी आवेदन को 2 दिन बाद 22 जुलाई 2024 को नया प्रकरण बता कर नामांतरण का आदेश दे दिया जाता हैं , निरस्त के बाद तो ऊपर के अधिकारी कार्यालय में प्रकरण जाना था ? 3 एक ही प्लॉट का पटवारी प्रतिवेदन, एक ही पटवारी द्वारा अलग अलग दिया जाना ? , पटवारी राजेन्द्र मीणा ने जब वकील ने नामांतरण के लिए आवेदन लगाया तब उस आवेदन पर प्रतिवेदन क्रमांक 16011 मे उल्लेख करता हैं की वर्ष 1959 मे यह जमीन आफताब बेगम के नाम से दर्ज हैं। फिर यहीं प्रकरण दोबारा ऑनलाइन मीणा ( दलाल) द्वारा लगाए जानें पर पटवारी द्वारा अपना प्रतिवेदन क्रमांक 16284 के माध्यम से प्रतिवेदन मे यह जमीन निजी स्वत्व में अंकित बताते हैं। जांच कार्यवही तो इस पटवारी पर भी होना चाहिए की एक ही जमीन पर उसी अतिरिक्त तहसीलदार कार्यालय में दो अलग अलग प्रतिवेदन क्यू और किसके कहने पर दे रहा है ? 4 मोबाईल नंबर वाला दलाल अभी एलएलबी के प्रथम वर्ष का छात्र भी हैं इससे बात करने पर पता चला की वह एक सामान्य नामांतरण प्रकरण जिसमें पूरा दस्तावेज होता है उस क्लाइंट से 10000 फीस लेते हैं जबकि नामांतरण की प्रक्रिया लोक सेवा केंद्र में स्वयं लगाने पर सिर्फ ढाई सौ रुपए ही लगते हैं, अगर किसी प्रकरण में दस्तावेज़ कमी होती हैं तो उस क्लाइंट से 50000 से लाखों तक फीस जाती हैं। और इस तहसील में प्रतिदिन 15/20 नामान्तरण आदेश लगभग होते ही हैं। जांच अधिकारी को इस मोबाईल नंबर के माध्यम से लगे समस्त आवेदनों की जांच कर, इस तहसीलदार और लिपिक की कार्यशैली को उजागर करनी चाहिए।विज्ञापन