: कहीं समय हाथ से निकल न जाए
Admin
Thu, Sep 14, 2023
यहां हर एक व्यक्ति को दिन के 24 घंटे उपलब्ध है। फिर भी कहते हैं हमारे पास समय ही नहीं है। हमें पता ही नहीं कि हमारे कीमती समय को हम कहां-गवा रहे हैं। समय के तीन प्रकार हैं। वेस्ट, रेग्युलर, और फ्रूटफुल। व्यर्थ, नियमित और सफल। व्यर्थ समय यानी बिना काम के हम गपशप करते रहते हैं। मोबाइल पर गेम खेलते हैं आदि, समय को व्यर्थ बिताते हैं। नियमित समय में हमें नियमित कार्य को करना पड़ता है। जैसे स्कूल, कॉलेज, क्लास, ऑफिस, घर के कम, खाना, नींद, आदि इसके लिए तो समय देना ही पड़ता है और देना जरूरी भी है।
मगर ऊपर के इन दोनों में ही हमारा पूरा समय बीत जाता है। जीवन को सफल करने के लिए जो कार्य करना आवश्यक है उसके लिए हमारे पास समय ही नहीं बचता। बच्चों को अपने स्कूल क्लास और पढ़ाई से समय ही नहीं मिलता, जो लाइब्रेरी से कोई महान व्यक्ति का आत्मचरित्र का किताब लेकर ले आकर पढ़े । फिर भी वह 3 घंटे का सिनेमा समय निकाल कर जरूर देखता है। जाने अनजाने में हम अपना सफलदायि समय व्यर्थ समय में गंवा देते हैं और सफलता के लिए हमारे पास कोई भी समय उपलब्ध नहीं रहता। जीवन की आयु अवस्था के तीन प्रकार हैं। टीन एज, मिडल एज और ओल्ड एज। कुमारव्यीन, मध्यमवयीन और वरिष्ठ नागरिक। अपने सफलदायी इस समय द्वारा कोई भी अच्छा कार्य करना है तो और उसके लिए कुमारो को पूछते हैं तो वे कहते हैं, अभी तो हमारा खाने-पीने का खेलने और पढ़ाई का वक्त है। हम अभी और कुछ नहीं कर सकते। "जो करना है वह आगे करेंगे" । मध्यमवयिन लोगों से को पूछते हैं तो वे कहते हैं अभी हम नौकरी धंधे में व्यस्त हैं। सुबह जल्दी काम पर जाते हैं। रात को देरी से लौटते हैं । खाना खाकर सो जाते हैं और कुछ करने के लिए हमारे पास समय ही नहीं है और अभी हम और कुछ नहीं कर सकते हैं। जब रिटायर वरिष्ठ नागरिको को पूछते हैं तो वे कहते हैं, अरे अभी तो हमारी कार्य शक्ति खत्म हुई। हम अभी कुछ भी नहीं कर सकते।जब हमको करना था तब हमने कुछ नहीं किया अभी हम क्या कर सकते हैं, हम से कुछ भी नहीं होगा। इस प्रकार कुमार और मध्यमवयिन अपनी जिम्मेदारी आगे धकेल देते हैं। आगे जाकर फिर पश्चाताप करते हैं कि गए दिन हम कहां इतने बिजी थे। जो हम इस अवस्था तक भी अपने जीवन में कुछ नहीं कर सके। तब समय उनके हाथों से निकल गया होता है। अपने जीवन के अनमोल समय को हमने कैसा व्यर्थ गवाया इसका पश्चाताप करने के सिवाय उनके हाथ में कुछ नहीं रहता । हम सबको इसी अवस्था से जाना है और जा रहे हैं । कहीं समय अपने हाथ से निकल ना जाए इसलिए आज ही सोचो, आज ही समझो और आज ही करो, नयी शुरुआत।विज्ञापन