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सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए स्वेच्छानुसार सहयोग की अपेक्षा है। फोन पे और गूगल पे फोन नंबर 9425539577 है।

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: -अगर हम सदा प्रसन्न  रहें तो संसार को दुर्लभ उपहार दे  सकते हैं ।

Admin

Sat, Jul 13, 2024
-मानसिक बल -पीड़ा - आप ने देखा  होगा हम सभी को जीवन में दुख, पीड़ा और किसी ना किसी कष्ट का सामना  करना ही पड़ता है । -कष्ट वा पीडा  तभी जीवन में आते हैं जब संसार को चलाने  वाले प्रकृति के नियमों का उलंघन करते हैं । -हम अधूरे  और असम्पूर्ण हैं, उसके लिये हमें कुछ  सबक सीखने की जरूरत होती है और यह सबक कुछ  कष्ट के साथ ही आते हैं । -हम अपने जीवन का दायित्व पूरी तरह से अपने ऊपर ले लेंवे तो पीड़ा को घटा  सकते हैं । -ब्रह्माण्ड अर्थात परमात्मा तुम्हारी हर्दिक इच्छाओं से अनजान नही है । -वह तुम्हे सदा प्रसन्न  देखना  चाहता  है । -हमें अपने आध्यात्मिक स्वरूप की ओर लौटना  है और यह भी  नही भूलना  है कि  हम बहुत सी  असम्पूर्णताओं से भरे  मनुष्य हैं, जो बहुत प्यारे आनंदो से घिरे हुये हैं  जिसे सहज ही धारण  किया जा सकता है । -अपनी ओर से बेहतरीन करो । बेहतरीन अर्थात जब भी  आप कुछ  सोचते हैं, बोलते हैं,  करते हैं,  और आप को अच्छा  अच्छा  लगता है तो यह बेहतरीन है । अगर बुरा बुरा लगता है तो समझो यह प्रकृती  के नियमों के विरुध्द है । -अगर हम सदा प्रसन्न  रहें तो संसार को दुर्लभ उपहार दे  सकते हैं ।

-प्रत्येक व्यक्ति में महान  बनने की  शक्ति है । शोहरत  बहुत कम लोगो को मिलती है परंतु  महान  प्रत्येक  व्यक्ति बन सकता है । इस लिये शांति, प्रेम वा दया के गुणों के स्वामी बनो ।

-हम स्वयं को छलते हैं । हम कायरता पूर्ण जीते हैं । हम अपने आप को उस विश्वास तंत्र  के  अनुसार ढाल  लेते हैं जो हमें आसपास के लोगो द्वारा सिखाया गया होता है । ऐसा साहस मत करना । सपने मत देखो । बहुत मत चमको  वरना  तुम गिरोगे और असफल हो  जाओगे  । यह नहीं सुनना ।

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