: यदि विचार अच्छे हैं तो मन भी अच्छा हैं
Admin
Sat, Jun 8, 2024
सहस्त्रार चक्र
यह ऊर्जा चक्र सिर पर जहाँ जन्म के समय पोला स्थान होता है, वहां पर है !
यहां ध्यान लगाने से हमें भगवान से शक्ति प्राप्त होने लगती है ! परमात्मा से प्राप्त शक्तियों की अनुभूति अपने तालू पर, अंगुलियों के छोरों और हाथों की हथेलियों पर महसूस करता है !
ज्यो ज्यों अभ्यास बढ़ता है, शांति और आनन्द को मनुष्य अपने रोम रोम में महसूस करता है !
शुद्व मन
भगवान की याद से हम मन की अच्छी संभाल कर सकते हैं ! इसलिये भगवान को याद करना मनुष्य का पवित्रतम कर्तव्य है !
केवल मनुष्य ही यह महान प्रयास करने में समर्थ हो सकता है, जिसके द्वारा वह अपने आत्मिक विकास में तेजी ला सकता है और अपने मन व बुद्वि की सीमा से ऊपर उठ सकता है !
कोई भी व्यक्ति एक क्षण के लिये स्थिर मन से नहीं बैठ सकता ! हमारा मन और बुद्वि अवश्य ही सदैव अपने विचार समूहों में विचरण करते हैं !
जिस प्रकार एक निश्चित दिशा में लगातार बहते रहने वाले पानी का ही नाम नदी है, उसी प्रकार विचारों का सतत प्रवाह ही मन है !
यदि विचार अच्छे हैं तो मन भी अच्छा है और यदि विचार विक्षिप्त हैं तो मन भी विक्षिप्त रहेगा ! संक्षेप में किसी व्यक्ति के विषय में हम यही कह सकते हैं- जैसा विचार, वैसा मन और जैसा मन वैसा व्यक्ति ! हमारे अंदर असीम शक्ति निहित है !
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