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: एफ आई आर (प्रथम सूचना रिपोर्ट)

Admin

Fri, May 17, 2024
प्रथम सूचना रिपोर्ट क्या है : प्रथम सूचना रिपोर्ट का उद्देश्य फौजदारी कानून को हरकत में लाने से है। जिससे पुलिस छानबीन का कार्य शुरू कर सके। प्रथम सूचना रिपोर्ट ही किसी मुकदमे का आधार होती है यह रिपोर्ट एक शिकायत या अभियोग के तौर पर होती है जिससे किसी अपराध के घटित होने या संभवत घटित होने की सूचना पुलिस को दी जाती है।  प्रथम सूचना रिपोर्ट किसके विरूद्ध और कौन व्यक्ति दर्ज करवा सकता है : , आमतौर पर कानून तोड़ने वाले व्यक्ति के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है। , कोई भी व्यक्ति जिसके साथ कोई भी अपराधिक घटना घटित हुई हो वह प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकता है। , किसी घटना से संबंधित दोनों पक्षकार भी अपनी अपनी प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकते है । प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाते समय पीड़ित  पक्षकार अपने साथ अपने मित्र रिश्तेदार अथवा अपने वकील को भी अपने साथ थाने में ले जा सकते है।      प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराधो की गंभीरता के अनुसार दर्ज की जाती है, जैसे किसी व्यक्ति ने गंभीर प्रकृति का गैर जमानती अपराध किया है तो उसके विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दी जाएगी।         परंतु यदि किसी व्यक्ति ने साधारण प्रकृति का जमानतीय अपराध किया है तो उसके विरुद्ध एफ आई आर न दर्ज करके पुलिस का हस्तक्षेप न करने वाली रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। अपराध की श्रेणी : १  जमानतीय अपराध (एन.सी.आर.) ,  २   गैर जमानती अपराध (एफ. आई. आर.)  , यदि दो जमानतीय अपराध के साथ एक गैर जमानती अपराध किसी व्यक्ति द्वारा कारित किया जाता है तो उसके विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। पुलिस का हस्तक्षेप न करने वाली एन सी आर दर्ज होने पर वादी के कर्तव्य : यदि किसी व्यक्ति की जुबानी सूचना पर थाने द्वारा एन.सी.आर. दर्ज कर ली जाती है,  तो ऐसी स्थिति में पीड़ित व्यक्ति अपने प्रतिवादी के विरुद्ध के विरूद्ध कार्यवाही करने के लिए संबंधित न्यायालय में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 155 की उप धारा (2)  के अंतर्गत विवेचना (मामले की छानबीन) करने का निवेदन कर सकता है।     यदि संबंधित न्यायालय द्वारा विवेचना छानबीन का आदेश पारित कर दिया जाता है तो, प्रतिवादी/अभियुक्त गण के विरूद्ध मामले की छानबीन संबंधित थाने के द्वारा की जा सकती हैं और अभियुक्त के जरिए सम्मन न्यायालय के समक्ष तलब किया जा सकता है। प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं करने पर कहा कहा शिकायत करे :

* अगर पीड़ित पक्षकार की प्रथम सूचना रिपोर्ट संबंधित थाने द्वारा किसी कारण वश नहीं दर्ज की जाती है तो ऐसी स्थिति में सर्व प्रथम जिले के पुलिस अधीक्षक को एक शिकायती प्रार्थना पत्र  प्रस्तुत किया जा सकता है।  * यदि थाने द्वारा इस पर भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती हैं, तो दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154(3) के अनुपालन में शिकायती प्रार्थना पत्र रजिस्टर्ड डाक से पुलिस अधीक्षक को भेजा जा सकता है ।  * राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में भी लिखित शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया जा सकता है। *  यदि रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजे गए शिकायती प्रार्थना पत्र पर भी कोई कार्यवाही न हो,  तो न्यायालय पर मजिस्ट्रेट के समक्ष द प्र स की धारा 156 की उपधारा (3) के अंतर्गत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाने का निवेदन किया जा सकता है।

प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाते समय किन बातों का ध्यान रखें : 1 घटना का सही समय लिखवाना चाहिए। 2 घटना का सही स्थान । 3 घटना का सही दिनांक । 4 प्रथम सूचना रिपोर्ट में कभी भी घटना के सही तथ्यों को तोड़ मरोड़कर नहीं लिखना चाहिए। 5 अपराध घटित होने के बाद जितनी जल्दी हो सके प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाना चाहिए, क्योंकि विलंब से सूचना देने पर अभियुक्त गण की तरफ से प्रायः तर्क दिया जाता है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट सोच विचार कर तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर लिखवाई गई है, जिससे अभियुक्तों को सन्देह का लाभ मिल सकता है। 6 प्रथम सूचना रिपोर्ट लिखवाने के पश्चात अंत में रिपोर्ट लिखाने वाले का नाम, पिता का नाम, पता और हस्ताक्षर भी होने चाहिए । रिपोर्ट दर्ज करने वाले अधिकारी को रिपोर्ट वादी को पढ़कर सुनाना चाहिए । 7 रिपोर्ट लिखवाने के पश्चात रिपोर्ट की प्रतिलिपि संबंधित थाने से वादी को मुफ्त में उपलब्ध कराई जाती है। 8 प्रथम सूचना रिपोर्ट में अभियुक्त का नाम और उसका विस्तृत विवरण जैसे उसका रंग, ऊंचाई , उम्र,  पहनावा और चेहरे पर कोई निशान आदि जरूर लिखवाना चाहिए । 9  अपराध कैसे घटित हुआ (अपराध घटित करते समय अपराधियों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले हथियार / औजार का नाम) अवश्य दर्शना चाहिए ।  10 अभियुक्त द्वारा चुराई गई या ली गई वस्तुओं की सूची। 11 अपराध के समय गवाहों के नाम और उनका पता ।  प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के समय को लेकर नियम कानून : किसी संघेय अपराध की सूचना प्राप्ति और उस सूचना के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट के अभिलिखित करने के बीच में बहुत ज्यादा समय नहीं होनी चाहिए। इसे तुरंत लिखवाना चाहिए ऐसा न करने से प्रथम सूचना रिपोर्ट की महत्ता घट जाती है, अगर उसे अपराध के तुरंत बाद न लिखवाई जाए ।   इसी संदर्भ में माननीय उच्चतम न्यायालय ने अप्रेम जोसफ के मामले में महत्वपूर्ण निर्णय दिया कि अपराध की सूचना पुलिस को देने के लिए कोई युक्तियुक्त समय अलग से तय नहीं किया जा सकता। युक्तियुक्त समय का प्रश्न एक ऐसा विषय है, जो हर मामले में न्यायालय ही फैसला करेगा।  सार्वजनिक व्यक्ति के अलावा थाने का भारसाधक अधिकारी भी अपनी जानकारी के आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकता हैं : * थाने का भारसाधक अधिकारी अपनी जानकारी और स्वत: की प्रेरणा से प्रेरित होकर अपने नाम से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवा सकता हैं । यदि उसकी नजर में एक संगेय अपराध (गैर जमानतीय) घटित हुआ है।  * टेलीफोन के जरिए प्राप्त सूचना को प्रथम सूचना रिपोर्ट के तौर पर लिखा जा सकता है टेलीफोन पर सूचना किसी परिचित व्यक्ति द्वारा दी गई हो जो अपना परिचय प्रस्तुत करें तथा सूचना में ऐसे अपेक्षाकृत तथ्य हो जिससे सगेय अपराध का घटित होना मालूम होता हो तथा जो थाने के भार साधक अधिकारी द्वारा लिखित रूप में भी दर्ज कर लिया गया हों। ऐसी सूचना को प्रथम सूचना रिपोर्ट माना जा सकता है।   

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