: हल्का से उच्च, विचारों का निर्माण
Admin
Tue, Sep 19, 2023
कोई व्यक्ति अपने मन में सदा हल्का विचार करता है। मगर कुछ समय बाद उसमें बदलाव आता है और वह व्यक्ति उच्च विचार करने लगता है।
एक जानी-मानी कहानी है। वालया एक चोर लुटेरा था। वह जंगल से गुजरने वाले यात्रियों को पकड़ कर उनसे धन और गहने लूटता था। कभी उनका खून भी करता था ।
एक दिन नारद जी ने उससे पूछा कि, "यह पाप कर्म तुम क्यों कर रहे हो ?" तो वालया ने बताया कि, यह मैं अपनी पत्नी और बच्चों के लिए कर रहा हूं!" तब नारद जी ने उससे कहा, तुम अपनी पत्नी और बच्चों से पूछो कि क्या वह तुम्हारे इस पाप कर्म के हिस्सेदार होने के लिए तैयार हैं ?"
तब उसने अपने पत्नी और बच्चों से पूछा मगर वह उसके पापकर्म में हिस्सेदारी होने के लिए तैयार नहीं थे । तो वालया ने नारद जी को इस पाप से मुक्ति पाने का उपाय पूछा। नारद जी ने उसे राम नाम जप कर तपस्या करने की सलाह दी। उसके अनुसार वह तपस्स्वी बना । जिन्होंने आगे जाकर रामायण महा चरित्र लिखा। आज वह वाल्मीकि ऋषि के नाम से जाने जाते हैं।
पहले उनके मन में जो हल्के विचार थे। उनकी जगह उच्च विचारों ने ली ।उनके विचारों ने ही उन्हें वालया से वाल्मीकि ऋषि बना दिया । इसे कहते हैं लोअर तू हाईयर।
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