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दवा का जेनरिक विकल्प उपलब्ध है या नहीं, यह पूछने का आपका अधिकार है : टैरिफ़ के ‘खेल’ से खुला बड़ा सच: भारत की जेनरिक दवाएं अमेरिका में सामान्य दाम पर, भारत में दस गुना रेट पर क्यों?

Ashwani Kumar Sinha

Fri, Aug 8, 2025

टैरिफ़ के ‘खेल’ से खुला बड़ा सच: भारत की जेनरिक दवाएं अमेरिका में सामान्य दाम पर, भारत में दस गुना रेट पर क्यों?

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता।
भारत में जेनरिक दवाओं को अक्सर कुछ डॉक्टर “घटिया सॉल्ट” बताकर मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि यही जेनरिक दवाएं अमेरिका में सामान्य दामों पर बेची जाती हैं और वहां की जनता इन्हें धड़ल्ले से इस्तेमाल करती है।


1. भारत—दुनिया का जेनरिक हब

  • भारत विश्व का एक प्रमुख जेनरिक दवा निर्माता और निर्यातक है।

  • अमेरिका की लगभग 40% जेनरिक दवाएं भारत से आयात होती हैं।

  • ये दवाएं विश्व स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप होती हैं और अमेरिका की FDA (Food & Drug Administration) की कड़ी मंजूरी के बाद ही निर्यात होती हैं।


2. अमेरिका में क्यों मिलती हैं सामान्य दाम पर?

  • अमेरिका ने अभी तक जेनरिक दवाओं पर कोई बड़ा टैरिफ़ नहीं लगाया है, ताकि दवाएं सस्ती और सुलभ रहें।

  • वहां दवा की कीमत बीमा कंपनियों, सरकारी योजनाओं और थोक सप्लाई चैन के कारण नियंत्रित होती है।

  • यही कारण है कि वही दवाएं, जो भारत में महंगी ब्रांडिंग के कारण दस गुना रेट पर बिकती हैं, अमेरिका में उचित दाम पर मिलती हैं।


3. भारत में क्यों बढ़ जाता है दाम?

  • ब्रांडेड कंपनियां जेनरिक दवा पर अपना नाम चस्पा कर भारी मार्क-अप लगाती हैं।

  • डॉक्टरों को कमीशन-आधारित प्रोत्साहन देकर मरीज को वही महंगी दवा लिखवाई जाती है।

  • बाजार में प्रिंटेड MRP कई बार असल उत्पादन लागत से 8–10 गुना तक होती है।


4. टैरिफ़ का खतरा

  • अगर भविष्य में अमेरिका जेनरिक दवाओं पर 25–50% टैरिफ़ लगा देता है, तो वहां की दवाओं की कीमतें बढ़ जाएंगी और कुछ दवाओं की कमी भी हो सकती है।

  • उद्योग संगठन Pharmexcil ने चेताया है कि ऐसा होना अमेरिका के उपभोक्ताओं के हित के खिलाफ होगा।


5. सच्चाई का निष्कर्ष

  • भारत में जेनरिक दवाएं गुणवत्ता में कमतर नहीं हैं—वे वही दवाएं हैं जो दुनिया भर, खासकर अमेरिका, में बिकती हैं।

  • फर्क सिर्फ ब्रांडिंग, मार्केटिंग और डॉक्टर–फार्मा कंपनियों के समीकरण का है।

  • मरीज जागरूक हों तो वही दवा भारत में भी सामान्य दाम पर मिल सकती है।


🔹 5 जागरूकता बॉक्स — जेनरिक दवाओं के बारे में ज़रूरी बातें

1. जेनरिक और ब्रांडेड दवा का सॉल्ट एक ही होता है

  • फर्क सिर्फ नाम, पैकेजिंग और कीमत का होता है, असर का नहीं।

2. गुणवत्ता का डर बेबुनियाद है

  • भारत की जेनरिक दवाएं वही हैं जिन्हें अमेरिका, यूरोप जैसे सख्त मानकों वाले देश मंजूरी देते हैं।

3. कीमत में भारी अंतर

  • जेनरिक दवा कई बार ब्रांडेड दवा से 70–90% सस्ती होती है।

4. डॉक्टर से खुलकर पूछें

  • लिखी गई दवा का जेनरिक विकल्प उपलब्ध है या नहीं, यह पूछने का आपका अधिकार है।

5. ‘जन औषधि केंद्र’ का इस्तेमाल करें

  • यहां सरकारी दर पर जेनरिक दवाएं मिलती हैं, जिनकी गुणवत्ता WHO मानकों के अनुरूप होती है।


स्रोत:


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