मुनि श्री का स्वागत विभाग संघचालक श्री सोमकांत उमालकर जी ने किया : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का चरित्र ही समाज का विश्वास है” – मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी
Ashwani Kumar Sinha
Sun, Aug 17, 2025
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का चरित्र ही समाज का विश्वास है” – मुनिश्री 108 प्रमाण सागर जी
भोपाल, 17 अगस्त 2025।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भोपाल विभाग द्वारा विद्यासागर कॉलेज, अवधपुरी में आयोजित कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम में जैन मुनिश्री 108 श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने स्वयंसेवकों एवं उनके परिवारों को संबोधित करते हुए कहा कि – “शुद्ध जीवन ही शक्तिशाली समाज और अखंड राष्ट्र की नींव है।”
मुनिश्री ने संघ की कार्यपद्धति की प्रशंसा करते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने हमेशा चरित्र, अनुशासन और समाज जीवन में नैतिकता पर बल दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शताब्दी वर्ष में संघ द्वारा चलाए जा रहे कुटुंब प्रबोधन अभियान का उद्देश्य हर घर में विश्वास, पारदर्शिता और मूल्य-आधारित जीवन का पुनर्निर्माण करना है।
🔹 पंच परिवर्तन अभियान का महत्व
मुनि श्री ने कहा कि शुद्ध जीवन ही पंच परिवर्तन का आधार है। उन्होंने समझाया कि यह अभियान व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र जीवन में नैतिकता, अनुशासन और करुणा जैसे मूल्यों को स्थापित करने का मार्ग है, क्योंकि “राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का चरित्र ही उसके विश्वास का आधार है।”
🔹 परिवार में विश्वास और पारदर्शिता आवश्यक
मुनि श्री ने चेताया कि आज परिवार टूट रहे हैं क्योंकि रिश्तों में विश्वास और पारदर्शिता घट रही है। पति-पत्नी के संबंध भी औपचारिक होते जा रहे हैं, क्योंकि रिश्तों में शुद्धता और सच्चाई का अभाव है।
उन्होंने कहा –
“समाज की नींव व्यक्ति है और व्यक्ति की नींव जीवन है। यदि जीवन शुद्ध है तो व्यक्ति सशक्त होगा। व्यक्ति सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा। अतः शुद्ध जीवन ही शक्तिशाली समाज का आधार है।”
🔹 जीवन मूल्य ही राष्ट्र की शक्ति
मुनि श्री ने अपने आशीर्वचन में कहा –
सच्चाई और नैतिकता जीवन की रीढ़ हैं।
करुणा और सहयोग हमारे जीवन का रक्त हैं।
अनुशासन और संयम हमारी साँसें हैं।
धर्म और मूल्य हमारी आत्मा हैं।
उन्होंने मन की पवित्रता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि मन गंगा की तरह शुद्ध हो तो मोक्ष का द्वार खुलता है, किंतु यदि मन दूषित हो जाए तो यह समाज और राष्ट्र को भी दूषित कर देता है।
🔹 चरित्र निर्माण से शक्ति का उदय
मुनि श्री ने कहा – “जीवन शुद्ध होगा तो चरित्र मजबूत होगा। चरित्र मजबूत होगा तो विश्वास जन्मेगा। विश्वास से एकता जागेगी और जब एकता होगी तो शक्ति प्रकट होगी।”
🔹 भारतीय संस्कृति का संरक्षण आवश्यक
उन्होंने आह्वान किया कि हर भारतीय को अपनी संस्कृति, भाषा और भोजन पद्धति के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि पश्चिमी जीवनशैली और परिवार विखंडन से समाज और राष्ट्र कमजोर होते हैं।🔹 परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति से
मुनि श्री ने अपने संदेश में कहा कि परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति से होती है। यदि हम आत्मबोध, सच्चाई, नैतिकता, करुणा और अनुशासन को अपनाएँगे तो परिवार मजबूत होंगे, समाज सशक्त होगा और राष्ट्र अखंड बनेगा।


कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत सह संघचालक श्री राजेश सेठी जी ने स्वागत उद्बोधन से किया।
मुनि श्री का स्वागत विभाग संघचालक श्री सोमकांत उमालकर जी ने किया।
कार्यक्रम का समापन प्रार्थना के साथ हुआ।
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