जब एक महिला स्वयं को उठाती है, तो वह पूरे समाज को उठाती है : RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान: “महिलाओं को पीछे रखने वाली परंपराओं से मुक्त करें, वे राष्ट्र की आधारशिला हैं
Ashwani Kumar Sinha
Sat, Jul 19, 2025
📰 RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान: “महिलाओं को पीछे रखने वाली परंपराओं से मुक्त करें, वे राष्ट्र की आधारशिला हैं”
सोलापुर (महाराष्ट्र), 18 जुलाई 2025 – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को महिलाओं की भूमिका और अधिकारों पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पुरानी और रूढ़िवादी परंपराओं की बंदिशों से मुक्त कर राष्ट्र की प्रगति में उनकी पूरी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि महिलाएं केवल परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों को आकार देती हैं।
मोहन भागवत के मुख्य बिंदु:
महिला सशक्तिकरण राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य – सोलापुर में आयोजित RSS‑संबद्ध संगठन उद्योगवर्धिनी (Udyogwardhini) के 25वें वर्षगांठ समारोह में भागवत ने कहा कि एक पुरुष जीवनभर काम कर सकता है, लेकिन महिला न केवल काम कर सकती है बल्कि नई पीढ़ियों को प्रेरित और सशक्त भी करती है।
मां का प्रेम और समाज निर्माण – उन्होंने कहा कि मां के प्रेम और स्नेह में पलकर बच्चे समाज के अच्छे नागरिक बनते हैं। “बच्चों के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण की असली नींव मां रखती है, जो राष्ट्र के भविष्य को तय करती है।”
ईश्वर का वरदान – भागवत के अनुसार, “भगवान ने महिलाओं को पुरुषों के सभी गुण तो दिए ही हैं, साथ ही कुछ विशेष गुण भी दिए हैं, जिनसे वे ऐसे कार्य कर सकती हैं जो पुरुषों के लिए असंभव हैं।”
पुरुषों के लिए संदेश – उन्होंने पुरुषों से आग्रह किया कि वे महिलाओं की क्षमताओं को पहचानें और उन्हें पारंपरिक बंदिशों से मुक्त करें।
“जिनके अंदर की चाह होती है, उन्हें करने दिया जाए। जब एक महिला स्वयं को उठाती है, तो वह पूरे समाज को उठाती है। उन्हें पुराने रीति‑रिवाजों की बेड़ियों से आज़ाद करें।”
महिलाओं को नेतृत्व की जगह दें – भागवत ने कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं और उन्हें खुला अवसर और नेतृत्व की जगह देना समय की मांग है।
कार्यक्रम का संदर्भ:
यह बयान “परिवार उत्सव” नामक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जो उद्योगवर्धिनी की 25वीं वर्षगांठ का हिस्सा था।
उद्योगवर्धिनी ने पिछले 24 वर्षों में हजारों महिलाओं को सिलाई, खाना पकाने और अन्य कौशल सिखाकर आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने में अहम योगदान दिया।
सामाजिक और राजनीतिक महत्त्व:
यह बयान RSS की महिलाओं को लेकर बदलती सोच को दर्शाता है, जहां महिलाएं केवल घरेलू भूमिकाओं तक सीमित न रहकर समाज निर्माण और राष्ट्र विकास की धुरी मानी जा रही हैं।
आलोचक इसे RSS‑BJP के महिला सशक्तिकरण को लेकर सकारात्मक छवि बनाने के प्रयास के रूप में भी देखते हैं।
निष्कर्ष:
मोहन भागवत का यह बयान स्पष्ट करता है कि RSS अब महिलाओं को राष्ट्र निर्माण की केंद्रीय शक्ति मानते हुए उन्हें पारंपरिक बंधनों से आज़ाद करने और हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का आह्वान कर रहा है।
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